पीरियड लीव की मांग को लेकर महिला शिक्षक संघ ने विधायक को सौंपा था ज्ञापन
सोनभद्र। बेसिक शिक्षा में सेवारत समस्त महिला शिक्षक व कर्मचारियों को माह में तीन दिन का पीरियड लीव/मासिक धर्म की मांग को गंभीरता से लेते हुए सदर विधायक भूपेश चौबे ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा है।
उत्तर महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष शीतल दहलान की अगुवाई में शिक्षिकाओं ने सदर विधायक को पत्रक सौंपा था। ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश की समस्त सेवारत महिला शिक्षक कर्मियों को माह में 3 दिन का पीरियड लीव, विशेष अवकाश के रूप में देना इसलिए आवश्यक है क्योंकि इस कठिन समय में महिलाओं की शारीरिक व मानसिक स्थिति अन्य सामान्य दिनों की तुलना में अलग और तकलीफ देय होती है, इस समय कमजोरी व पेट में दर्द बनी रहती है। डॉक्टर का परामर्श भी है महिलाओं को “इन दिनों” भाग दौड़ से बचना चाहिए अन्यथा यूट्रस से होने वाली गंभीर समस्या के कारण उनका स्वास्थ्य प्रभावित होगा, जिस का असर उनके गर्भ पर भी पड़ सकता है। संविधान के अनुच्छेद 15 व 42 के अन्तर्गत राज्य महिलाओं व लड़कियों के कल्याण हेतु विशेष उपबन्ध कर सकती है, संविधान के इस प्राविधान के अन्तर्गत बिहार सरकार ने 30 वर्ष पहले (सन 1992) भी अपने राज्य की समस्त सेवारत महिला शिक्षक व कर्मियों को विशेष अवकाश के रूप में पीरियड लीव प्रदान की जा रही है, जो सराहनीय है (बिहार सरकार वित्त विभाग, उप्र सरकार द्वारा उप्र महलिओं व लड़कियों के लिए मिशन शक्ति व अन्य कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ चलाकर महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है, जो सराहनीय व प्रशंसनीय है। महिलाओं की इस अनिवार्य व प्राकृतिक समस्या पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बिहार की भांति उप्र में भी समस्त महिला शिक्षक व कर्मचारियां को विशेष अवकाश के रूप में पीरियड लीव/मासिक धर्म अवकाश के रूप में प्रदान करने हेतु शासनादेश जारी करने की मांग किया।

