होली मिलन समारोह काव्य गोष्ठी आयोजित

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On: Tuesday, March 30, 2021 10:27 AM

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रावटसगंज (सोनभद्र) सामाजिक, साहित्यिक, कलात्मक संगठन विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के तत्वाधान में ट्रस्ट के प्रधान कार्यालय मे 21वा होली मिलन, विचार /काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ कवि दिवाकर दिवेदी “मेघ विजयगढी” ने कविता सरस्वती के चरणों में अर्पित किया-” *तेरेचरण की वंदना मां हम करते रहे।”*
कार्यक्रम के आयोजक एवं ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी ने कार्यक्रम में उपस्थित कवियों और साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कहा कि *-” विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी प्रश्न द्वारा होली मिलन एवं काव्य गोष्ठी समारोह का आयोजन किया जा रहा है इस कार्यक्रम में उपस्थित समस्त साहित्यकारों पत्रकारों प्रबुद्ध जनों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूं।आशा और विश्वास करता हूं कि रंग पर्व थी इस रंगारंग कार्यक्रम में उपस्थित जन काव्य का आनंद उठाएंगे।*
ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी हर्षवर्धन केसरवानी ने उपस्थित अतिथियों का अबीर गुलाल से स्वागत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार, कथाकार रामनाथ शिवेंद्र ने कहा कि-” इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए और हमें समकालीन तरफ बढ़ना चाहिए क्षेत्र मुक्त हैं बावजूद इसके भी कविता का ढांचा है और इसमें भी कविताएं असरकारक होती हैं समकालीन हमारे जीवन से निकल गया तो कुछ नहीं बचेगा।”
विशिष्ट अतिथि पत्रकार साहित्यकार सनोज तिवारी ने कहा कि-“होली मिलन समारोह एक ऐसा कार्यक्रम है, जहां पर सभी साहित्यकार, पत्रकार, कवि एवं प्रबुद्ध वर्ग के लोग इकट्ठा होते हैं और अपने विधाओं के माध्यम से एक दूसरे का मनोरंजन करते हुए सकारात्मक संदेश समाज को देते हैं इस तरह के कार्यक्रम कि अपनी एक विशेष महत्ता है और यही महत्ता इन्हें सांस्कृतिक गति प्रदान करती है।
द्वितीय सत्र का शुभारंभ सरोज कुमार सिंह के होली गीत-
“राधे बिना श्याम दीवाने हुए,
बंसी के धुन पर बेगाने हुए।
“चारों ओर नशा छाया है,
फागुन के मस्त महीने में।
कवि राकेश शरण मिश्र “गुरु”ने कोरोना संक्रमण को अपनी काव्य पंक्तियों में पिरोते हुए कहां की-
*’कितने डरावने दिन थे,
कितनी भयानक रात थी।*

होली पर काव्य पाठ करते हुए कहा कि-“होली की पूर्व संध्या पर,
सोनभद्र के कवियों ने आपात बैठक बुलाई।
हास्य व्यंग के प्रख्यात रचनाकार जयराम सोनी ने वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि-
विदेशी महिला के साथ
नेताजी अस्त-व्यस्त पाए गए।
गीतकार/ गजलकार शिव नारायण शिव ने- श्रृंगार रस पर आधारित गीत गाते हुए कहा कि-
*”नशा कुछ इस तरह का है,
सनम इस बार होली में।”*

भोजपुरी गीत सुनाते हुए कहा कि- **फागुन क मस्त महीना निराला बा,
केहू घूमि घूमि होरी गावे।**

कविअमरनाथ नाथ “अजेय” ने समसामयिक विषय पर काव्य पाठ किया-‘
*उत्पाती लहरें मत छेड़ो तटबंधो को,*
*सदियों की आंखें भर जाएगी।*
कवि सुशील राही ने आध्यात्मिक कविता पढ़कर सब को भावविभोर कर दिया-
*मनमोर बसो चितचोर के संग,
आनंग का पाठ पढ़ावत है।*
काव्य गोष्ठी में होली की मस्ती बढ़ाते हुए कवि ने काव्यपाठ करते हुए-
*”फागुन में बुलाया मुझे आंख मार के,*
*कसमें बहुत दिलाया मुझे आंख मार के।*
कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे कवि प्रदुमन त्रिपाठी ने फागुनी बयार को ऊंचाई प्रदान करते हुए कहां कि-*_फागुनी रंग मन में उमंग लिए ,
चढ़े हैं चंग अंग मतवाले से।_*कार्यक्रम में उद्यमी राधेश्याम बंका, प्रदीप केसरी, पीयूष केसरी, साहित्यकार प्रतिभा देवी, तृप्ति केसरवानी, मंजू केसरी, सहित अन्य प्रबुद्धजन, साहित्यकार, पत्रकार उपस्थित रहे।यह कार्यक्रम 30 मार्च को दोपहर 12:00 बजे से अपराहन 3:00 बजे तक चला है।)

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