सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज, ओबरा ,दुद्धी , रेनुकूट ,अनपरा आदि जगहों पर दिखा असर ।
सोनभद्र/उत्तरप्रदेश।
डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहाँ हर क्षेत्र ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है, वहीं ई-फार्मेसी (ऑन लाइन दवा बिक्री) भारत के पारंपरिक दवा बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के नेतृत्व में देश भर के लाखों दवा दुकानदारों ने ऑनलाइन दवाओं की अनियंत्रित बिक्री और इसके दुष्प्रभावों के विरोध में 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।

इसी कड़ी में जनपद सोनभद्र में भी दवा व्यवसायों द्वारा अपनी अपनी दुकानें बंद रखी ।
रेनुकूट व दुद्धी में मेडिकल दूकाने इस बंद के समर्थन के दिखी। केमिस्टों द्वारा अपनी अपनी दूकाने बंद कर शांति पूर्वक विरोध प्रदर्शन करते दिखे ।
केमिस्टों का मानना है कि ई-फार्मेसी न केवल उनके पारंपरिक व्यवसाय और आजीविका को संकट में डाल रही है, बल्कि यह बिना उचित डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के दवाओं की बिक्री को बढ़ावा देकर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रही है। यह हड़ताल सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करने और ई-फार्मेसी के लिए सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर की गई है।
ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ हड़ताल
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ऑनलाइन दवा बिक्री और नियामक उल्लंघनों के खिलाफ आज देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। दवा विक्रेता संगठन का आरोप है कि यह बिक्री मौजूदा कानूनों का उल्लंघन करती है। आज की हड़ताल के चलते सभी मेडिकल स्टोर 24 घंटे के लिए बंद रहेंगे, लेकिन आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। AIOCD का दावा है कि देशभर के 12.5 लाख दवा विक्रेता इस हड़ताल में शामिल हैं।
*इमरजेंसी सेवाएं*: निजी अस्पतालों की दुकानों से भर्ती मरीजों को दवा मिली। जीवन रक्षक दवाएं डॉक्टर की पर्ची पर दी गईं।
दवा विक्रेताओं के संगठन के मुताबिक 3 मुख्य मांगें/वजहें थीं:
1. *ऑनलाइन/ई-फार्मेसी पर रोक*: मोदी सरकार द्वारा ऑनलाइन दवा बिक्री को नियमित करने के कदम का विरोध। AIOCD का कहना है कि स्विगी, फार्मईजी जैसे प्लेटफॉर्म बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन दवाएं बेच रहे हैं।
2. *कोविड की छूट रद्द करना*: कोविड-19 में घर-घर दवा पहुंचाने की जो छूट GSR 220(E) नोटिफिकेशन से मिली थी, उसे रद्द करने की मांग। संगठन का आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां उसी का दुरुपयोग कर रही हैं।
3. *नकली दवा और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा*: AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि भारी डिस्काउंट के लालच में नकली दवाओं का चलन बढ़ रहा है और मरीजों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पैदा हो रही है। “दवा चावल-दाल नहीं है” – यानी दवा को किराना सामान की तरह नहीं बेचा जा सकता।
इस हड़ताल पर दवा विक्रेताओं में मतभेद भी दिखा। ‘ऑल इंडिया केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन’ ने कहा कि वे ई-फार्मेसी के विरोधी तो हैं, लेकिन हड़ताल का समर्थन नहीं करते क्योंकि आम जनता को परेशानी होगी।

