Sonbhadra:श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण-सुदामा का प्रसंग सुनाकर श्रोता भाव विभोर हुए

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On: Saturday, September 28, 2024 2:49 PM

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कथा का श्रवण करने मात्र से ही पाप पुष्य में बदल जाते है: कुणाल जी महाराज

पूर्णाहुति व भंडारा होगा आज

सोनभद्र। राबर्ट्सगंज शहर के विकास कालोनी में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के विश्राम दिवस शनिवार को कथा वाचक श्री श्री कुणाल जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर प्रवचन दिए। इस दौरान श्रद्धालुओं की ओर से जयकारे लगाते हुए पुष्प वर्मा भी की गई।

कथा वाचक कुणाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि श्री कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है

कथा वाचक कुणाल जी महाराज ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए। यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा जी से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र (सखा) से सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए ओर उनका अभिनंदन किया। कथा वाचक ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण सरल शब्दों में वर्णन किया कि उपस्थित लोग भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के भाव उत्पन्न होते है। उन्होंने नवयुग सवारने की कथा, श्रीमद् भागवत का सार सहित अन्य कथाओं के बारे में विस्तार से श्रद्धालुओं को बताया। उन्होंने सुदामा और कृष्ण की झांकी पर फूलों की वर्षा की इसके बाद वर्मा परिवार द्वारा प्रसाद वितरण किया गया। श्रद्धालुओं को धार्मिक भजनों पर नृत्य करते व जयकारे लगाते हुए भी देखा गया। जिससे माहौल धर्ममय हो गया। इसके पश्चात मुख्य आयोजक अनंत कुमार वर्मा ने बताया कि रविवार को यज्ञ पूर्णाहुति, हवन व एक बजे से भंडारा का आयोजन होगा। जिससे सभी श्रद्धालुओं प्रसाद का ग्रहण कर सकते है। इस मौके पर पं. राहुल पाण्डेय, मुख्य यजमान मालती देवी, मोनी वर्मा, मंजूसा वर्मा, संगीता, विनीता, मीनू, प्रिया सिंह, रीना सिंह, मीना सिंह, सीमा द्विवेदी, संगीता सिँह, सुरेंद्र जायसवाल, मिठाई लाल सोनी, सालिक राम द्विवेदी, अरुण सिंह, अमित सिंह, भुनेश्वर जायसवाल, गोपाल सिंह, अमिय कुमार वर्मा आदि रहे।

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