शिकवों से मुरझाए रिश्तों में लौटी नई बहार-
लोक अदालत में लिखी गई रिश्तों की नई इबारत, आपसी विवादों को भूल
फिर साथ जीवन गुजारने को राजी हुए 13 जोड़े
- सोनभद्र। अरसा बाद खुशियों के रंग खिले और गिले-शिकवे भूल फिर जिंदगी मुस्कुराई। एक-दूजे का हाथ थामा तो आंखें भर आईं। आंसू कुछ पश्चाताप के थे तो कुछ पुनर्मिलन की खुशियों के। सात जन्मों के बंधन को संवारते, समेटते और अब फिर न कभी अलग होने की कसमें खाते वे लौट गए अपनी उन राहों पर जहां परिवार की खुशियां उनके लौटने का पूरी शिद्दत से इंतजार कर रही थीं। रिश्तों के ये अनोखे रंग नजर आए शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में और इसके प्रेरक बने पारिवारिक न्यायालय सोनभद्र के प्रधान न्यायाधीश राजेंद्र सिंह। अपनी राहें अलग करने अदालत आईं 13 जोड़ियां फिर से जिंदगी के सफर में हमसफर बन गईं। वैवाहिक वादों के कुल 13 मुकदमे यहां सुलह-समझौते आधार पर निस्तारित किए गए।
गलतफहमियां, कुछ शिकवे और कुछ परेशानियां। विवादों की शुरुआत हुई तो फासले बढ़ते गए और फिर दांपत्य जीवन की मिठासकड़वाहट में बदलती चली गई। मामला अदालत मंे पहुंच गया। ऐसे जोड़ों के लिए शनिवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरणए नई दिल्ली के निर्देशन में यहां जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत वरदान बन गया। राजेन्द्र सिंहए चतुर्थए प्रधान न्यायाधीशए
परिवार न्यायालयए सोनभद्र के प्रयासों से ऐसे 13 मुकदमे सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किए गए। किसी सूरत पर साथ रहने को राजी नहीं हो रहे इन जोड़ों को समझाना आसान नहीं था लेकिन अदालत के प्रयास रंग लाए। दोनों पक्षों को बारी-बारी सुना गया। एक-दूसरे से जुड़ी उनकी शिकायतें जानी गईं और फिर समाधान का रास्ता तलाशा गया। आखिरकार दोनों पक्षों को अपनी भूल समझ आई और वे आपसी शिकवे भूल फिर हो गए एक-दूजे के। वर्षों से अलग रह रहे इन दंपतियों के मिलन की खुशियां देखते बनीं। पारिवारिक अदालत के प्रधान न्यायाधीश राजेंद्र सिंह की मौजूदगी में इन्हें मालाएं पहनाई गईं और मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दी गईं।इन जोड़ियों का हुआ मिलन मधु बनाम पंकजर,बीना बेगम बनाम असरफ शाह,सुनीता देवी बनाम विनोद कुमार श्रीवास्तव,रूबीना बनाम अशरफसु,खन बनाम जगदीश,प्रतिमा बरनवाल बनाम रत्नेश बरनवाल,बृजेश विश्वकर्मा बनाम सरोज,पंकज बनाम मधु,उषा देवी बनाम रामपाल,उषा देवी बनाम बाबूलाल हुआ

