जंगलों में प्राकृतिक पौधों के संरक्षण पर अधिक जोर दिए जाने की आवश्यकता:-सुनील कुमार त्रिपाठी

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On: Tuesday, November 23, 2021 1:35 PM

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घोरावल(पी डी)सोनभद्र जिले में प्राकृतिक संरक्षण की दिशा में कार्य करने वाले अनेक लोग अपने अपने तरीके से कार्य करते हैं किन्तु सोनभद्र जिले के आदिवासी इलाके के निवासी सुनील कुमार त्रिपाठी है। जो पिछले 2009-10 से ही जंगल के रख -रखाव व जंगलो के संरक्षण में लगे है। जिसका परिणाम यह हुआ कि इनके तरफ जंगल मे आम,कटहल महुआ, पियार की संख्या काफी बढ़ गयी है। त्रिपाठी जी अकेले लगभग 400 बीघे वीरान हो चुके जंगल को बिना किसी पारिश्रमिक लिए पुनः वृक्षों से आच्छादित कर दिया है। वीरान एवं ठूठ हो चली पहाड़ियों पर विगत 5-7 वर्षों में पुनः हरियाली लौट आयी है जिसको कभी भी देखा जा सकता है।
इनके एक दशक के अनुभव को साँझा करते हुए अपार हर्ष हो रहा है। सुनील कुमार के कहा कि जंगलो में प्लांटेशन की आवश्यकता नही है, बल्कि उससे भी अधिक आवश्यकता है प्राकृतिक पौधों को संरक्षण देने की । साथ ही यह भी कहा कि हर वर्ष प्लांटेशन वृक्षारोपण पर करोड़ों अरबो रुपये जनता का पैसा खर्च होता है। और अधिकतर वृक्षारोपण जो रोपित होते हैं वह सुरक्षा के अभाव में समाप्त हो जाते हैं। जो कागजों पर वृक्षों की आंकड़ा बताये जाते है हकीकत में मौके पर नहीं हैं। जबकि जंगलों में प्राकृतिक पौधों की अपार संभावनाएं है । स्थानीय प्राकृतिक पौधे हर वर्ष वर्षाकाल में जंगलों में स्वतः भारी पैमाने पर उगते है,परंतु संरक्षण के अभाव में समाप्त हो जाते है।
सोनभद्र जिले के ओबरा बन प्रभाग में ही आप पिछले 10 वर्षों के वृक्षारोपण की जाँच करा लेवें पौधरोपण की सच्चाई सामने आ जायेगी। आपको 3 वर्ष पूर्व लगवाए गए प्लांटेशन कही नजर ही नही आएंगे। सोनभद्र जिले के सभी बनप्रभाग में हर वर्ष एक ओर से वृक्षारोपण होता है दूसरे तरफ से पूर्व के वृक्षारोपण अधिकारियों की निष्क्रियता से समाप्त होते चले जाते है। जंगलों में बनी फारेस्ट चौकिया वीरान रहती हैं।जलावनी के नाम पर हरे प्लान्टेशनो को उजाड़ा जा रहा है। हरी लकड़ियां जलावनी के नाम पर ट्रेनों से एक सहर से दूसरे सहर पहुचा दी जा रही है जिम्मेदार लोग जिम्मेदारी पूर्वक अपने कार्य व दायित्वों का निर्वहन करें तो नष्ट हो रहे वन को बचाया जा सकता है।
अगर प्लान्टेशनो के जगह पर प्राकृतिक पौधों के संरक्षण पर सिर्फ 5 वर्षों तक ध्यान दे दिया गया तो मैं विश्वास के साथ कहता हूं के अगले 50 वर्षों तक किसी भी तरह के वृक्षारोपण की जरूरत नही होगी। जबकि संरक्षण पर प्लान्टेशनो के अपेक्षा काफी कम धन खर्च होगा। त्रिपाठी जी ने सम्बन्धित अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ जिलाधिकारी सोनभद्र व माननीय मुख्यमंत्री महोदय का इस तरफ ध्यान आकृष्ट करने हेतु निवेदन किया है।

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