दुद्धी(रवि सिंह)सोनभद्र:कहा जाता है शिक्षा एक अनमोल रत्न है।शिक्षा के बिना मनुष्य की जीवन अधूरा माना जाता है।शिक्षा के लिए आज लोग बड़े हाईटेक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं वहीं सरकारी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाने की खबरें अक्सर आती रहती है।सरकारी नौकरी एवं धनाढ्य लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने से परहेज करते हैं। लोगों का मानना होता है कि सरकारी स्कूलों मेें पढ़ाई का स्तर संतोषजनक नहीं होता है।लोग जहां प्राईवेट स्कूलों को ज्यादा तवज्जो दे रहें है वहीं सोनभद्र जिले के दुद्धी तहसीलदार ज्ञानेन्द्र कुमार यादव की एक पहल मिसाल के तौर पर पेश किया जा सकता है।
दुद्धी तहसीलदार का यह पहल कौतुहल का विषय बना हुआ है। यहां के तहसीलदार ने अपने बच्चे का दाखिला प्राइवेट स्कूल के बजाये सरकारी प्राथमिक विद्यालय दुद्धी प्रथम में कराया है। जो सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित पैसे वाले परिवारों के लिए एक मिसाल के तौर पर चर्चा में तेजी से बनकर उभरी है।
तहसीलदार ज्ञानेन्द्र कुमार यादव अभी हाल ही में दुद्धी में तहसीलदार के पद पर कार्यभार ग्रहण किया है।उन्होंने दुद्धी तहसील के तहसीलदार के पद पर कार्यभार संभालने के पखवाड़े भर के बाद ही अपनी 6 वर्षीय बेटी श्रेया का दाखिला बीआरसी परिसर स्थित सरकारी स्कूल में कराया है। उन्होंने अपनी बेटी की प्राथमिक स्तर की पढ़ाई के लिए सरकारी प्राथमिक विद्यालय को चुना है।
इस पहल से अब लगता है कि सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर उठ रही उंगलियां थम जाएंगी। जाहिर है कि जिस स्कूल में तहसीलदार के बच्चे पढ़ेंगे, उस स्कूल की शिक्षा का स्तर सुधरने की गुंजाइश बढ़ जाती है।
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय बीआरसी परिसर के प्रधानाध्यापक शकील अहमद ने बताया कि दुद्धी तहसीलदार ने अपनी बेटी का कक्षा 1 में नामांकन कराकर मिशाल पेश किया है।इससे अन्य सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक महत्वपूर्ण सन्देश जाएगा और लोग सरकारी स्कूलों की ओर आकर्षित होंगे।हम अपने विद्यालय परिवार की ओर से तहसीलदार दुद्धी को बधाई देते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए मेरे सरकारी स्कूल को चुना।
तहसीलदार ने अपनी बच्ची का नाम प्राइमरी स्कूल दुद्धी में लिखवाया कक्षा एक मे पढ़ रही बच्ची
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