आदिवासी महिला की पिटाई के मामले में आख्या न देने का मामला
सोनभद्र। आदिवासी महिला की पिटाई करने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट खलीकुज्ज्मा की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए आख्या न आने पर कड़ा रुख अपनाते हुए बभनी एसओ को 28 अक्तूबर को कोर्ट में तलब किया है। साथ ही स्पष्टीकरण भी मांगा है। यह आदेश बभनी थाना क्षेत्र के चपकी गांव निवासी रामकिसुन के जरिए कोर्ट में दाखिल धारा 156(3) दंड प्रक्रिया संहिता के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिया है।
दिए प्रार्थना पत्र में रामकिसुन ने आरोप लगाया है कि एक सितंबर 2021 को सुबह 9 बजे उसकी पत्नी मवेशियों के लिए घास खेत में काट रही थी तभी गांव के वंशी प्रसाद, राधेश्याम, दिनेश कुमार,अवधेश कुमार व दुर्गेश कुमार आ गए और पत्नी को जातिसूचक शब्दों से गाली देने लगे। जब बगल में ही घास काटते समय गाली गलौज की आवाज सुनकर वह गया और मना किया तो पत्नी को बेरहमी से मारने-पीटने लगे। इसकी सूचना थाने पर दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब एसपी सोनभद्र को रजिस्टर्ड डाक से सूचना भेजा, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब 5 अक्तूबर को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। अदालत ने सुनवाई करते हुए 11 अक्तूबर को बभनी थाने से आख्या तलब किया गया था। लेकिन कोई आख्या नहीं भेजी गई। उसके बाद 18 अक्तूबर, 20 अक्तूबर व 21 अक्तूबर की तिथि नियत की गई, फिर भी आख्या नहीं भेजी गई। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाते हुए बभनी एसओ को 28 अक्तूबर को कोर्ट में तलब किया है। साथ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है।
बभनी एसओ 28 को कोर्ट में तलब
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