वहीं परिजनों ने बताया 4 दिन से डॉक्टर साहब लगातार कर रहे थे इलाज
वहीं परिजनों के द्वारा बताया गया डॉक्टर साहब के द्वारा हमेशा बाहर से ही दवाइयां लिखी जाती है
सूत्रो की माने तो बड़े पैमाने पर चल रहा है कमीशन का खेल पैथोलॉजी से लेकर मेडिकल स्टोर तक
सोनभद्र मधुपुर। आपको बताते चले कि ग्रामसभा गढईगांव निवासी शशि कुमार व उनकी पत्नी शनिवार कि सुबह अपनी 1 साल की मासूम को लेकर के इलाज हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मधुपुर आए जहां पर डॉक्टर ने डायरिया बताते हुए कुछ दवाइयां बाहर से लिखकर दिए और बोले जाओ इतने में बच्ची ठीक हो जाएगी लेकिन बच्ची ठीक होने की की जगह करीब 12:00 तक बच्चे में सुधार नहीं आया बल्कि स्वास्थ्य बिगड़ता गया फिर बच्ची को सीएससी मधुपुर लेकर परिजन पहुंचे तो डॉक्टर साहब नदारद मिले तो वहीं फार्मासिस्ट के द्वारा बताया गया डॉक्टर साहब कमरे में आराम कर रहे हैं डॉक्टर साहब के रूम पर जाकर कई बार दरवाजा खुलवाने के लिए प्रयास किया गया तो डॉक्टर साहब द्वारा कहा गया चलो आते हैं फिर भी आधे घंटे तक अपने मासूम को गोद में लिए मां-बाप बैठे रहे मासूम जिंदगी और मौत से लड़ती रही आखिरकार हुआ वही मासूम जिंदगी की जंग हार गई मगर सवाल यह उठता है कि अगर बच्ची को समय रहते सही इलाज दिया गया होता तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी लेकिन यह मामला कोई नया नहीं आए दिन इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती रहती है अब देखना यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसे लापरवाह डॉक्टरों के ऊपर किस तरह की कार्रवाई करते हैं या फिर ऐसे ही मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ होता रहेगा

