सोनभद्र/उत्तरप्रदेश।
साधु टीएल वासवानी उस समय से संबंधित थे जब देशभक्ति औपनिवेशिक जुए से आजादी के संघर्ष के रूप में प्रकट हुई थी। वह देवत्व की चिंगारी थे जो भारत के युवाओं में मातृभूमि के प्रति प्रेम और ईश्वर के प्रति प्रेम को भरने के लिए आवश्यक था।

25 नवंबर, 1879 को हैदराबाद-सिंध में जन्मे साधु वासवानी का झुकाव महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होने और बाद में एक शानदार अकादमिक करियर को त्यागने के बाद संत की ओर हो गए। उन्होंने अपना ध्यान शिक्षा की ओर लगाया, और आधुनिक जीवन और भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण सत्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए शिक्षा में मीरा आंदोलन शुरू किया।
साधु वासवानी एक विपुल लेखक, अंग्रेजी और सिंधी में सैकड़ों पुस्तकों के लेखक भी थे।
साधु वासवानी की शिक्षाओं का एक अनिवार्य हिस्सा ‘सभी जीवन के लिए सम्मान’ की गहरी जागरूकता थी। 25 नवंबर, साधु वासवानी का जन्मदिन, मांस रहित दिवस और पशु अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है।

साधु वासवानी का 1966 में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
प्रदेश के महापुरुषों एवं अहिंसा के सिद्धान्तों का प्रतिपादन करने वाले विभिन्न युग पुरुषों के जन्म दिवसों एवं कुछ प्रमुख धार्मिक पर्वों को “अभय” अथवा “अहिंसा” दिवस के रूप में मनाये जाने के उद्देश्य से महावीर जयन्ती, बुद्ध जयन्ती, गाँधी जयन्ती, साधु टी०एल० वासवानी एवं शिवरात्रि महापर्व पर प्रदेश की समस्त स्थानीय निकायों में स्थित पशु वध शालाओं एवं गोश्त की दूकानों को बन्द रखे जाने के निमित्त समय-समय पर निर्देश निर्गत किये गये हैं।उसी क्रम में शासन द्वारा उपरोक्त पर्वों की भाँति साधु टी०एल० वासवानी के जन्मदिन दिनांक 25 नवम्बर, 2022 को मांस रहित दिवस घोषित करते हुए प्रदेश की समस्त नागर स्थानीय निकायों में स्थित पशुवधशालाओं एवं गोश्त की दूकानों को बन्द रखे जाने हेतु लिये गये निर्णय का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किये जाने का निर्देश दिया गया है।

