सोनभद्र /उत्तरप्रदेश।
👉 21 लाख की आबादी वाला जिला सोनभद्र में सिर्फ 0.08% लोग ही करते हैं स्वैच्छिक रक्तदान
👉 तीसरे वर्ष भी जिले में सर्वाधिक स्वैच्छिक रक्तदान कराने वाली संस्था बनी प्रयास
👉 माह अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक कुल जिले में आयोजित रक्तदान शिविर की संख्या 32 जिसके द्वारा कुल रक्त संग्रह 1088 यूनिट।
जनपद सोनभद्र का सबसे बड़ा रक्तदान शिविर बीते वर्ष 30 सितंबर को रेणुकूट के पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह के प्रथम पुण्यतिथि पर प्रयास फाउंडेशन द्वारा आयोजित शिविर में किया गया।
जिसमें कोरोनाकाल के दौरान पूर्व चेयरमैन की याद में 125 लोगों ने रक्तदान कर श्रद्धांजलि दी। इसी तरह जिले का दूसरा बड़ा रक्तदान शिविर शहीद भगत सिंह,राजगुरु,सुखदेव के 90 वे पुण्यतिथि शहीद दिवस पर इस वर्ष 23 मार्च को प्रयास फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था। इस शिविर में कुल 71 लोगों ने रक्तदान किया। जिले में सर्वाधिक स्वैच्छिक रक्तदान कराने वाली 5 संस्थाएं प्रयास फाउंडेशन, उत्सव ट्रस्ट,लहू, उर्जान्चल खाना बैंक व मारवाड़ी युवा मंच सक्रिय हैं। पिछले एक वर्ष में जिला ब्लड बैंक में 6728 यूनिट रक्त कलेक्शन हुआ जिसमें से 5640 यूनिट ऑनकॉल यानी मरीज के तीमारदार द्वारा प्राप्त हुआ तथा 1088 स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों से मिला।
बातचीत के दौरान ब्लड बैंक काउंसलर रविंद्र प्रसाद ने बताया कि जो कुल 1088 यूनिट स्वैच्छिक रक्तदान शिविर से रक्त प्राप्त हुआ उसमें से शिविर आयोजक और भारत सरकार के नियमानुसार 878 यूनिट ब्लड डोनर कार्ड और विदाउट डोनेशन जिला अस्पताल में भर्ती इन बीमारी से ग्रसित रोगियों जैसे थैलेसीमिया, कैंसर,एड्स, हिमोफिलिया, जननी सुरक्षा योजना, लावारिस ,कैदी आदि को दिया गया। इस प्रकार देखा जाए तो कुल कलेक्शन 6728 यूनिट और खपत 6544 यूनिट हुआ। अगर ऐसे कहे तो प्रत्येक माह 550 से 600 यूनिट की ब्लड की आवश्यकता जिला ब्लड बैंक की है जिसमे 34 थैलेसीमिया पीड़ित मरीज है जिन्हें प्रत्येक माह एक से दो यूनिट खून की जरूरत होती है।

मीडिया कर्मियों से जिले में सर्वाधिक स्वैच्छिक रक्तदान कराने वाली संस्था प्रयास के सचिव दिलीप दुबे ने बातचीत के दौरान बताया कि अगर हम रक्तदान जागरूकता की बात करें तो हमारे सोनभद्र जिले की कुल जनसंख्या इक्कीस लाख है जिसमे से 65% लोग रक्तदान के योग्य है यानी 13 लाख 65 हज़ार हुआ इसमे से 1% लोग साल में एक बार स्वैच्छिक रक्तदान करें तो तेरह हज़ार छह सौ पचास यूनिट हो जाएगा जो कुल खपत के दोगुना के लगभग बराबर है। अगर ऐसा हो जाए तो जिले में रक्त के लिए कोई परेशान नहीं होगा और ना ही मरीज के परिजन से ब्लड देने की डिमांड होगी लेकिन यह संभव नहीं है। अब इसका जिम्मेदार किसको माने सरकार,सिस्टम या जागरूकता की कमी या रक्तदाताओं में संवेदनशीलता जिले में लगभग 48% आदिवासी एससी एसटी की जनसंख्या है और 42% अशिक्षित हैं जो रक्तदान की बात सुनते ही मरीज को हॉस्पिटल में छोड़कर परिजन भाग जाते हैं जिनके लिए ये संस्थाएं मदद करती हैं। दिलीप दुबे ने युवाओं से अपील की है कि रक्तदान करने से कोई परेशानी नहीं होती यदि आपकी उम्र 18 वर्ष है और आपका वजन 45 किलो से अधिक है तथा रक्तदान करते समय हीमोग्लोबिन की मात्रा 12.5 है और पिछले 6 माह में कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं हुआ है तो पुरुष वर्ष में चार बार और महिला वर्ष में तीन बार रक्तदान कर सकते हैं। इससे आपका फ्री हेल्थ चेकअप भी हो जाता है और किसी का जीवन बच जाता है। दिलीप ने अपने सहयोगियों दीपेश जायसवाल, गौतम अग्रवाल, अमित चौबे, ऋषभ शाह, राजेश पासवान, आशीष शुक्ला, कृष्णा, सद्दाम, शुभम, मणिभूषण सिंह का भी आभार व्यक्त किया जो 365 दिन सेवा में लगे रहते हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ एस के मंजुल ने बताया कि रक्तदान को लेकर औरतों को भी अपना नजरिया बदलना पड़ेगा क्योंकि भारत में सबसे अधिक ब्लड की आवश्यकता महिलाओं को पड़ती है जैसे डिलीवरी ऑपरेशन,एनीमिया या बहुत सारे ऑपरेशन होते हैं इसलिए महिलाओं को अपने बच्चों को और घर के पुरुषों को भी प्रेरित करना चाहिए कि वे रक्तदान करें क्योंकि महिलाएं हमेशा प्रेरणा स्रोत का कार्य करती हैं और प्रेरणादाई होती हैं। अंत में दिलीप दुबे ने कहा कि *कुछ यूं इंसानियत का मान करते हैं देखकर थोड़ा रक्त खुद पर अभिमान करते हैं और जो समझते हैं मौत और जिंदगी का फासला यहां बस वही देवदूत दुनिया में रक्तदान करते है

