(रवि सिंह ,”क्राइम जासूस”)
दुद्धी/सोनभद्र ।
पुत्र पुत्री की लंबी आयु की कामना को लेकर माताओं ने कठिन व्रत जीवित्पुत्रिका विधि विधान से पूजा अर्चना कर संपन्न किया बता दें कि दुद्धी क्षेत्रों सहित आसपास के क्षेत्रों गांव में में जीवित्पुत्रिका बहुत ही विधि विधान के साथ किया जाता है वही गुड्डी कस्बा के विभिन्न मंदिरों धार्मिक स्थलों व घरों पर महिलाओं द्वारा इस निर्जला कठिन व्रत किया परंपराओं की माने तो इस व्रत में महिलाओं द्वारा निर्जल 36 घंटे का उपवास रख इस कठिन व्रत को करती हैं परंपरा विश्वास रखकर अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए करती चली आ रही हैं।

जीवित्पुत्रिका-व्रत के साथ जीमूतवाहन की कथा जुड़ी है। इसमें गन्धर्वों के राजकुमार जीमूतवाहन अपने जीवन का दाव पर लगाकर नागवंश की रक्षा करते हैं। जीमूतवाहन के अदम्य साहस से नाग-जाति की रक्षा हुई और तबसे पुत्र की सुरक्षा हेतु जीमूतवाहन की पूजा की प्रथा शुरू हो गई। आश्विन कृष्ण अष्टमी के प्रदोषकाल में पुत्रवती महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।
आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन उपवास रखकर स्त्री सायं प्रदोषकाल में जीमूतवाहन की पूजा करती हैं तथा कथा सुनने के बाद आचार्य को दक्षिणा देती है, वह पुत्र-पौत्रों का पूर्ण सुख प्राप्त करती है। व्रत का पारण दूसरे दिन अष्टमी तिथि की समाप्ति के पश्चात किया जाता है। यह व्रत अपने नाम के अनुरूप फल देने वाला है। क्षेत्र के हिसाब से कई जगह चील चीलोरी की कहानी व पांडव की कहानी भी कही जाती हैं।

