बीजपुर:वाराणसी 7 अगस्त सोन साहित्य संगम के संरक्षक, रिहंद साहित्य मंच के महासचिव एवं एनटीपीसी के सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘शिखर’ की काव्य संग्रह “आंसुओं से मैं नहाता रहा” उर्फ “शिखर काव्य कुंज” का विमोचन उत्तर प्रदेश सरकार के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री एवं पूर्वांचल विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष माननीय डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ द्वारा शुक्रवार को डी ए वी इंटर कालेज वाराणसी में आयोजित एक समारोह में किया गया।
कवि, लेखक एवं साहित्यकार के रूप में ख्यातिलब्ध पुस्तक के रचनाकार ने अपनी साहित्यिक अभिरुचि को कविता के माध्यम से पुस्तक के रूप में बड़े ही सुंदर ढंग से संजोया है। शिखर जी की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं किंतु काव्य संग्रह ‘आंसुओं से मैं नहाता रहा ‘ इंसान और इंसानियत की दास्तां को कविताओं के रूप में बयां करती हुई एक हृदय स्पर्शी पुस्तक है। विमोचन के उपरांत माननीय मुख्य अतिथि ने इस काव्य संग्रह की तारीफ़ करते हुए कहा कि “आंसुओं से मैं नहाता रहा” काव्य संग्रह इंसानियत को जिंदा रखने का मार्ग प्रशस्त करेगा। शिखर जी की यह पुस्तक इंसान को इंसान बनाने, लोगों के हृदय में करुणा जगाने, सामाजिक न्याय का मार्ग प्रशस्त करने तथा आंसुओं की कीमत समझने के लिए सहायक हैं। शिखर ने अपनी पुस्तक में गीत, गजल और अन्य कविताओं को भावनात्मक रूप से “आंसुओं से मैं नहाता रहा” नामक गुलदस्ते में सजाया है जिसे ‘शिखर’ काव्य कुंज’ का नाम भी दिया गया है।
वहीं विमोचन के पूर्व पुस्तक के रचनाकार ‘शिखर’ जी ने मुख्य अतिथि डॉ दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ का अंगवस्त्रम् से अभिनन्दन किया। एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय में सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) के पद पर कार्यरत मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘शिखर’ द्वारा रचित उक्त काव्य संग्रह का प्रकाशन नोएडा के वर्तमान अंकुर द्वारा प्रकाशित किया गया है। पुस्तक के संपादक निर्मेश त्यागी ‘वत्स’ ने अपने संपादकीय में लिखा है कि-अपने आप में यह एक अनूठा संग्रह है जो कवि की संवेदनशीलता को प्रकट करता है। सुनीता ‘सोनू’ अपनी भूमिका में लिखती हैं कि “विविध रंगों से सजी हुई शिखर की रचनाओं में रुमानी प्यार का एहसास है तो देश पर मर मिटने का जज्बा भी है… ।” रचनाकार ने दो शब्द के दौरान स्वयं लिखा है कि “आंसुओं का सीधा संबंध मानवता एवं संवेदनाओं से है अतः प्रेमी युगल, परिवार समाज, प्रकृति एवं रिश्तों पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए इंसानियत बचाने तथा आंसुओं की कद्र करने की वकालत इस काव्य संग्रह ‘आंसुओं से मैं नहाता रहा’ में की गई है।”दया और करुणा से ओतप्रोत रचनाएं अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक हैं।विमोचन के इस शुभ अवसर पर श्रीमती दयालु, प्रवक्तागण एवं समाजसेवी रुपेश कुमार नागवंशी, भरत गुप्ता, राहुल सहित अन्य साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विगाग के विभागाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन राजन सोनवानी ने किया।

