विस्थापित परिवार के लोग भूखमरी व दवा इलाज के अभाव में प्रशासनिक गेट पर किया विरोध प्रदर्शन

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On: Thursday, October 29, 2020 1:38 PM

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विस्थापित परिवार के लोग भूखमरी व दवा इलाज के अभाव में प्रशासनिक गेट पर किया विरोध प्रदर्शन

3 वर्षों से विस्थापित परिवार रोजी- रोटी के लिए रोजगार की मांग कर रहा है

सीएसआर के अपर महाप्रबंधक व स्थानीय प्रभारी निरीक्षक के आश्वासन पर घर लौटा असहाय परिवार

बीजपुर(बग्घा सिंह)सोनभद्र:थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा बिजपुर टोला शांति नगर के रहवासी बीटा देवी पत्नी राम सुभाग पाल ने रोजगार की मांग को लेकर प्रशासनिक गेट पर गुरुवार की सुबह धरने पर बैठ गई ।अस्वस्थ महिला के धरने पर बैठने की खबर जैसे ही प्रबंधन सहित पुलिस को जानकारी मिली आनन-फानन में मौके पर पहुंचे । महिला के पति को 60 वर्ष होने के कारण कार्य से निकाल दिया गया है जिसके वजह से परिवार के सामने भुखमरी व दवा इलाज का संकट प्रगट हो गया है मरता तो क्या करता उसको समझ में नहीं आ रहा है कि हम क्या करें मजबूर होकर प्रबंधन के आश्वासन से आजिज आकर अपनी समस्या को स्थानीय प्रशासन व प्रबंधन को फिर से जताया ताकि हमारी समस्या को गंभीरता से लिया जाए ।अपर महाप्रबंधक सीएसआर अरविंद कुमार शुक्ला से प्रभारी निरीक्षक श्याम बहादुर यादव ने वार्ता कर एक पखवारा के अंदर पीड़ित परिवार को रोजगार मुहैया कराने का आश्वासन दिए । इस दौरान एक माह के अंदर रोजगार मिलने के आश्वासन पर पीड़ित परिवार अपने घर चले गए । एनटीपीसी रिहंद में कंपनी का आगमन हुआ था, तब यहां के ग्रामीण लोगों में एक खुशी की आस जगी थी कि पूरे देश को अपनी रोशनी से जगमग करने वाली कंपनी उनके जीवन में भी रोशनी की एक किरण जरूर जगाएगी…… पर ऐसा हुआ नहीं । एनटीपीसी प्रबंधन ने उस समय ग्रामीणों को सब्जबाग दिखाते हुए उनकी जमीन हासिल कर ली और उनकी जमीनों पर अपने प्रोजेक्ट बैठा दिए पर उन विस्थापित ग्रामीणों पर कोई ध्यान नहीं दिया जिनकी जमीनें ली गई । कंपनी से उस समय कई मुद्दों पर एग्रीमेंट हुआ था जिसका कंपनी आज सही रूप से पालन नहीं कर रही 3 बिजली प्लांट स्थानीय जगह पर बिजली उत्पादन में निरंतर अपनी भागीदारी दे रहे हैं वही यहां के विस्थापित परिवार के बेरोजगार युवक रोजगार के संकट से जूझ रहे हैं उनको धुआ व बीमारी के सिवाय और कुछ नहीं मिल रहा है आज मूलभूत सुविधाएं सड़क, पानी, बिजली की बात तो दूर पेट भरने व अपने परिवार का जीविकोपार्जन करने के लिए विस्थापितों को दर-दर की ठोकर खानी पड़ रही है तथा अन्यत्र पलायन करना पड़ रहा है इसकी एक बानगी गुरुवार की सुबह एनटीपीसी रिहंद परियोजना के प्रशासनिक गेट पर देखने को मिल ही गई 
विस्थापित राम शुभग पाल का कहना है कि वे परियोजना द्वारा विस्थापित हैं फिर भी उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है उनका आरोप है कि 3 साल पूर्व उन्हें परियोजना द्वारा 60 वर्ष के बाद ओवरऐज दिखाकर उनका रोजगार छीन लिया गया था इसके बाद वे परियोजना प्रबंधन से लगातार तीन वर्षों से अपनी लड़के या बहू को रोजगार पर रखने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं पर प्रबंधन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है, प्रबंधन द्वारा उनके लड़के को कभी मेडिकल अनफिट कहकर टरका दिया जाता है तो कभी बाद में आने की बात कहकर उनकी बात को अनसुना कर दिया जाता है 
मामले की सूचना पर मौके पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक बीजपुर श्याम बहादुर यादव ने सूझबूझ का परिचय देते हुए विस्थापित परिवार को समझा-बुझाकर धरने पर बैठे परिवार को घर भेज दिए बहरहाल विस्थापन नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की क्या गाइडलाइन है व एनटीपीसी प्रबंधन उसका कितना पालन कर रही है यह जांच का विषय है ।

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