Sonbhadra News: नक्सल प्रभावित अति पिछड़े जिले में खुली स्वास्थ्य महकमें की पोल,
मजबूरन रिक्शा ट्राली पर मरीज को लेकर अस्पताल ले जाते दिखे लोग
सोनभद्र। तमाम दावे के बाद भी सरकार की एम्बुलेंस की सेवा देने की सुस्त रवैया सुधरने का नाम नहीं ले रही। ऐसी कई घटना घटित हो चुकी है। जिसमें एम्बुलेंस समय से न पहुंचने पर मरीज काल के गाल में समा चुका है। लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों की मन मर्जी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। बात की जाए दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के खजुरी गांव का एक मामला देखने को मिला। जहां मरीज के परिजनों ने एंबुलेंस 108 की देरी पर मरीज को रिक्शा ट्राली पर अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों की मानें तो मरीज सोनी देवी (40) पुत्र उदय गुप्ता निवासी खजुरी के ऋषि कुमार गुप्ता ने बताया कि शनिवार को मेरी चाची घर के बाहर लकड़ी लेने गई थी। उसी दौरान उनके बायें हाथ के अंगुली में एक सांप ने डंस लिया। जिसके बाद परिजनों ने सांप काटने की बात सुनकर परेशान हो गए।
झाड़ फूंक के चक्कर मे कुछ देर जरूर लगी। झाड़ फूंक से आराम न मिलता देख भतीजे ने सीएचसी दुद्धी ले जाने के लिए डायल 108 एंबुलेंस के लिए कॉल किया, लेकिन उधर से कहा गया कि इंतजार करिये। जिसमें आधा घंटा समय बीत गया और देर होता देख मरीज को ट्राली पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां इमरजेंसी में चिकित्सक डॉ विनोद सिंह द्वारा उपचार किया गया। लोगों की शिकायत है कि एम्बुलेंस को कॉल करने पर समय लगता है और तो और बाद में पता चलता है कि आधे से एक घण्टा लगेगा एम्बुलेंस पहुंचने में। अगर ऐसे में मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत हो तो फिर मरीज का भगवान ही मालिक है। ओबरा से लेकर चोपन में ऐसी कई घटना देखने को मिली है। एम्बुलेंस की देरी से मरीज की मौत तक हो गई है।

