कोन(जयदीप गुप्ता)। बुधवार की शाम आई तेज आंधी-तूफान ने विकास खंड कोन क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त कर दी। डाला से कोन विद्युत उपकेंद्र तक करीब 32 किलोमीटर लंबी लाइन पर कई स्थानों पर पोल, खंभे और तार क्षतिग्रस्त हो जाने से क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। बिजली विभाग के लगभग दो दर्जन कर्मचारी लगातार मरम्मत कार्य में जुटे हैं, लेकिन तीसरे दिन शुक्रवार की शाम तक भी आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी।
कोन और कचनरवा उपकेंद्र से जुड़े कोन, रामगढ़, निगाई, नौडीहा, सलैयाडीह, हर्रा, डोमा, मिश्री, खेतकटवा, कचनरवा, लाल बिजौरा तथा मीटिहिनिया किशुनपुरवा समेत अनेक गांवों में बिजली ठप रहने से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भीषण गर्मी और उमस के बीच ग्रामीणों को दिन और रात दोनों समय भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे अधिक संकट पेयजल को लेकर उत्पन्न हो गया है। बिजली न रहने से घरों में लगे समरसेबल और पानी की मोटर बंद पड़े हैं, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। वहीं मोबाइल फोन चार्ज न होने से आपसी संपर्क भी प्रभावित हो रहा है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। रातभर अंधेरे और गर्मी के कारण लोगों की नींद तक हराम हो गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि लगातार तीन दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित रहने से घरेलू कार्यों के साथ-साथ दुकानदारों और छोटे व्यापारियों का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। कई दुकानों में रखे खाद्य पदार्थ खराब होने लगे हैं, जबकि इंटरनेट और मोबाइल सेवा प्रभावित होने से ऑनलाइन कार्य भी ठप पड़ गए हैं।
उधर बिजली विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि आंधी-तूफान में अनुमान से कहीं अधिक नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर बिजली के पोल टूट गए हैं और तार जमीन पर गिर गए हैं। विभागीय टीमें लगातार मरम्मत कार्य में लगी हुई हैं, लेकिन दुर्गम क्षेत्र और व्यापक क्षति के कारण आपूर्ति बहाल करने में समय लग रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डाला से कोन उपकेंद्र तक लगे जर्जर तार और पुराने बिजली पोल ही बार-बार संकट की मुख्य वजह बन रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जर्जर लाइन और पोल नहीं बदले गए तो हल्की आंधी में भी क्षेत्र को इसी तरह अंधेरे का सामना करना पड़ेगा।

