पिपरी से दीपू तिवारी क्राइम जासूस
पिपरी सोनभद्र आज करवा चौथ मनाया जा रहा है. यह पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है.
इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति के लिए दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं. फिर शाम को करवा माता की पूजा करके चंद्र दर्शन करती हैं और उनको अर्घ्य देती हैं. इसके बाद पति का चेहरा देखकर उनके हाथ से पानी पीकर व्रत का पारण करती हैं.
इस व्रत की महिमा शास्त्रों में भी वर्णित है. इस व्रत को रखने से विवाहित महिलाओं के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है. इस दिन महिलाएं शाम के समय स्नान-ध्यान कर महिलाएं नए वस्त्र पहनती हैं. सोलह श्रृंगार करती हैं. इसके बाद करवा माता और भगवान गणेश की पूजा करती हैं. करवा चौथ की कथा का पाठ करती हैं. फिर चंद्रोदय के बाद चंद्र देव की पूजा करती हैं. उनको अर्घ्य देती हैं.
कैसे खोलें व्रत?
इसके बाद छलनी से पहले चंद्र देव को फिर अपने पति को देखती हैं. फिर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत का पारण करती हैं. करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा बहुत महत्वपूर्ण होता है. हालांकि कई बार मौसम खराब भी होता है, जिसके चलते चंद्रमा नजर नहीं आता. ऐसी स्थिति में विवाहित महिलाएं अपना व्रत कैसे खोल सकती हैं. आइए इसके बारे में जानते हैं.
ये है व्रत खोलने की विधि
करवा चौथ पर आसमान में चांद नजर न आने की स्थिति में महिलाओं को शास्त्र द्वारा निर्धारित नियम अनुसार चंद्र देव की पूजा करनी चाहिए. उनको जल का अर्घ्य देना चाहिए. महिलाएं अगर चाहें तो शिव जी के माथे पर विराजित चंद्रमा के दर्शन करके व्रत का पारण कर सकती हैं. इसके लिए सही दिशा और समय में चंद्र देव को अर्घ्य देना चाहिए. उस समय समय छलनी से चंद्र देव के दर्शन करने चाहिए. इसके बाद छलनी से पति को देखकर व्रत खोलना चाहिए. घर में भगवान शिव की प्रतिमा न होने पर छत पर एक चौकी पर चावल या शुद्ध आटे से चांद की आकृति बनानी चाहिए और फिर उसकी पूजा करनी चाहिए

