राकेश केशरी,
विंढमगंज सोनभद्र स्थानीय मां काली मंदिर परिसर से सटा बरगद के वृक्ष के नीचे वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए पंडित राजुरंजन तिवारी ने पुजा कराने के दौरान कहा कि वट सावित्री का व्रत सौभाग्यवती महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं। वट सावित्री व्रत में जो पूजा में चढ़ाया जाता है, उन्हीं चीजों को खाया जाता है। वट सावित्री व्रत में आम,केला, चना, पूरी, खरबूजा, पुआ आदि इन सभी चीजों से वट वृक्ष की पूजा की जाती है। जब व्रत पूरा हो जाता है, तब इन्हीं चीजों को खाया जाता है।
वट सावित्री का व्रत से जुड़ी हुई है पौराणिक मान्यता :
पंडित राजुरंजन तिवारी ने कहा कि वट सावित्री का पूजन सुहागन महिलाएं को जरूर करना चाहिए। उन्होंने पौराणिक व्रत कथा के मुताबिक मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री बेहद गुणवान थीं। जब सावित्री युवा हुईं तो राजा अश्वपति ने अपने मंत्री के साथ उन्हें अपना वर चुनने के लिए भेजा। उन्होंने वर रूप में महाराज द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को चुना। उसी समय देवर्षि नारद ने बताया कि शादी के एक वर्ष पश्चात सत्यवान की मृत्यु हो जाएगी। इसके बाद राजा अश्वपति ने सावित्री को दूसरा वर खोजने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। नारदजी से सत्यवान की मृत्यु का समय पता करने के बाद वो पति व सास-ससुर के साथ जंगल में रहने लगीं। नारदजी के बताए समय के कुछ दिनों पहले से ही सावित्री ने सत्यवान की दीर्घायु के लिए व्रत रखना शुरू कर दिया। जब यमराज उनके पति सत्यवान के प्राण ले कर जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे पीछे चल दीं। यमराज उन्हें बार बार वापस जाने के लिए कहते रहे, लेकिन सावित्री वापस लौटने के लिए तैयार नहीं हुईं। सावित्री की धर्म निष्ठा से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वर मांगने के लिए कहा, तो सावित्री ने कहा कि वे उनसे तीन वरदान मांगना चाहती हैं। यमराज ने उन्हें वर मांगने की स्वीकृति दे दी। तब सावित्री ने पहले वरदान में कहा कि मेरे नेत्रहीन हो चुके सास ससुर को आंखों की ज्योति मिल जाए। दूसरे वर में उन्होंने कहा कि उनके ससुर का छूटा राज्यपाठ वापस मिल जाए और आखिरी में उन्होंने पुत्रवती का वरदान मांग लिया। यमराज के तथास्तु कहते ही सावित्री बोलीं कि यदि आप मेरे पति के प्राण वापस नहीं करेंगे तो मैं पुत्रवती कैसे हो पाउंगी। तब यमराज को अपनी भूल का आभास हुआ और उन्होंने सत्यवान के प्राण वापस कर दिए। इस तरह सावित्री ने ना केवल सत्यवान की जान बचाई बल्कि अपने परिवार का भी कल्याण किया।
वट सावित्री की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और माता लक्ष्मी का वास होता है :
पंडित राजुरंजन तिवारी ने बताया कि वट सावित्री का व्रत सौभाग्यवती महिलाओं का मुख्य पर्व है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्यवती रहने की कामना करती हैं। इस दिन सत्यवान-सावित्री की यमराज के साथ पूजा की जाती है। माना जाता है कि वट सावित्री की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और माता लक्ष्मी का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे। इसलिए सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री का व्रत रखती हैं।

