अशोक मद्धेशिया
संवाददाता
जुगैल/सोनभद्र। शक्तिपीठ धाम जिरही माई मंदिर पर श्री दुर्गाष्टमी के पावन पर्व श्रद्धालुओं ने मां महागौरी की पूजा की गई। चैत्र नवरात्र की अष्टमी मनाई जा रही है। जिसे लेकर देवी मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं। नवरात्र की अष्टमी के दिन शक्तिपीठ जुगैल जीरही माता मन्दिर में भी देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं।आज चैत्र नवरात्र की अष्टमी में नौ देवियों के आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा भक्त कर रहे हैं। नौ देवियों के स्वरूप में आठवीं देवी माता महागौरी का है। यह शांत स्वभाव वाली देवी मानी जाती हैं। इस देवी का सच्चे मन से पूजन करने से हर मनोकामना पूरी होती है। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है। इस गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है- ‘अष्टवर्षा भवेद् गौरी।’ इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। महागौरी की चार भुजाएं होती हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा है। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।
अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। देवी गौरी की पूजा का विधान भी पूर्ववत है अर्थात जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक आपने मां की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी प्रत्येक दिन की तरह देवी की पंचोपचार सहित पूजा करते हैं।

