*अशोक मद्धेशिया*
*संवाददाता*
ओबरा/सोनभद्र । ऊर्जा निगमों में उच्चतम स्तर पर फैले भ्रष्टाचार एवं निचले स्तर पर उत्पन्न किये जा रहे भय के वातावरण के विरोध में सभी अवर अभियंता एवं अभियन्ताओ द्वारा अपने कार्यस्थल पर *सविनय अवज्ञा आंदोलन* एवं ओबरा परियोजना के ऊर्जा भवन गेट पर प्रतिदिन विरोध सभा का आयोजन किया जा रहा है। (इसमे सम्मलीत अवर अभियंता एवं अभियंताओ द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन/असहयोग आन्दोलन के दौरान जारी कार्यक्रम के अनुसार पूरे प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं एवं आमजन को कोई परेशानी न हो, इसका ध्यान रखते हुए निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाये रखी जायेगी, कार्य के निर्धारित अवधि में नियमानुसार अपने पद के लिए निर्धारित कार्य कर रहे हैं ।
आज चौथे दिन की विरोध सभा की अध्यक्षता इं0 अभय प्रताप सिंह ने की, इस सभा में पदाधिकारियो के द्वारा बताया गया कि *शीर्ष प्रबन्धन के ईआरपी व बिजली खरीद में किये गये भ्रष्टाचार पर कार्यवाही नहीं होने, विगत वर्ष जन्माष्टमी पर लाखों उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति ठप्प करने की दोषी निजी कम्पनी के विरूद्ध कार्यवाही नहीं होने, मनमाने तरीके से किये गये नियम विरूद्ध उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां निरस्त न करने के दृष्टिगत उ0प्र0रा0वि0प0 अभियंता संघ एवं रा0वि0प0जू0इं0 संगठन, उ0प्र0 के सदस्य अभियंताओ एवं अवर अभियन्ताओ द्वारा प्रदेश प्रबन्धन के साथ पूर्ण असहयोग/सविनय अवज्ञा प्रारंभ किया जा रहा है क्योकि ऊर्जा निगमो के वर्तमान उच्च प्रबन्धन महोदय द्वारा विद्युत उत्पादन की परियोजनाओं को न्यूनतम आवश्यक मनी, मैटीरियल उपलब्ध न कराया जाना, मशीनों के वार्षिक अनुरक्षण को कई-कई वर्ष टाला जाना, सामान्य व आकस्मिक अनुरक्षण कार्य के निष्पादन हेतु खण्ड स्तर पर उपलब्ध वाहनों को हटाये जाने के निर्देश, कोयले का भुगतान समय से न किये जाने आदि प्रतिगामी निर्देशों के द्वारा प्रदेश को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले विद्युत उत्पादन गृहों को प्रबन्धन द्वारा ठप्प किये जाने की साजिश की गयी है । ऊर्जा निगमों में संसाधनों की भारी कमी की गयी है। साथ ही कार्मिकों की सेवा शर्तां में प्रतिगामी परिविर्तन कर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को दण्डित कर भय का वातावरण बनाने का कार्य भी किया गया है।
ऐसा भय का वातावरण जिसमें ईआरपी में हुए भ्रष्टाचार और 20-21 रू0 प्रति यूनिट मंहगी बिजली खरीद के मामले पृष्ठभूमि में दबे रह जायें, यह ना ही ऊर्जा निगमों के हित में है ना ही प्रदेश के हित में। ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा मनमानी और तानाशाहीपूर्ण तरीके से एकतरफा निर्णय कर कर्मचारी सेवा नियमावली में प्रतिगामी परिवर्तन किये गये हैं जिससे कर्मचारियों के सेवा शर्तां पर विपरीत प्रभाव पड़ा है जो कि 25 जनवरी 2000 में माननीय मंत्रिमण्डलीय समिति के साथ हुए समझौते और विद्युत अधिनियम 2003 का खुला उल्लंघन है।
इस प्रकार दिनांक 04,05, एवं 06 अप्रेल 2022 को ऊर्जा निगम के समस्त अवर अभियन्ताओ एवं अभियन्ताओ द्वारा केन्द्र द्वारा लिये गये निर्णय का समर्थन करते हुए सामूहिक अवकास पर जाने हेतु एक स्वर में सहमति प्रकट की गयी एवं वर्तमान में कार्यवाहक मा0 मुख्यमंत्री जी से ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशान्ति एवं टकराव टालने हेतु सार्थक कार्यवाही किये जाने की अपील की।
विरोध सभा में इं नवीन चावला, इं धीरज वर्मा, इं मनीष कुमार,इं स्वप्नल यादव, इं ज्ञानेन्द्र सिंह, इं आनंद पटेल, इं वकार अहमद, इं अमित कुमार वर्मा, इं आशीष अग्रवाल, इं आर0के0 सिंह, इं आर0 के0 झा, , इं एल0 बी0 मौर्य, इं बृजेश यादव, इं सन्तोष यादव, इं अभिषेक सिंह, इं अजय प्रसाद, इं सुनील गिरी, इं मीरचन्द पाल, इं कुमार कमलेश, इं आनंद, इं संतोष पान्डेय, इं एन पी सिंह , इं आशीष कुमार, आदि उपस्थित रहे।

