*बालू साइटों पर प्रशासन की छापेमारी, नापी होने तक बालू खनन पर रोक।*

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अशोक मद्देशिया,

चोपन ,सोनभद्र

जुगैल/सोनभद्र। ई-टेंडरिंग की कुछ बालू साइटों पर सीमा से आगे बढ़कर नदी एरिया में खनन करने तथा काश्तकारी परमिट वाली साइटों पर पट्टे वाली जगह की बजाय, सोन तथा कनहर नदी में उतर कर खनन करने की शिकायत पर, नापी होने तक, बालू खनन पर रोक लगा दी गई है। इनशिकायतों को लेकर बुधवार को कई साइटों पर छापेमारी किए जाने से हड़कंप मच गया।
अगोरी एरिया के खंड चार, आसपास में नापी करने के साथ ही, खंड एक और खंड दो की एरिया में घुसकर काश्तकारी परमिट की आड़ में खनन की मिली शिकायतों पर भी नापी की कार्यवाही की जाती रही। उधर, टीम पहुंचने से पहले ही इसकी भनक लगने के कारण, साइटों से पोकलेन मशीनें आदि हटा ली गई थीं।
आप सभी को अवगत कराते चले कि पट्टे के लिए निर्धारित एरिया से बढ़कर नदी के तलहटी क्षेत्र में जहां बालू खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं। वहीं, फसल बोई जमीन पर जुगाड़ से काश्तकारी पट्टा हासिल कर नदी एरिया से बालू खनन की शिकायतें बराबर बनी हुई हैं। मजदूरों की जगह बालू खनन में पोकलेन के प्रयोग को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। अगोरी क्षेत्र, रेड़िया क्षेत्र से लेकर दुद्धी क्षेत्र तक शिकायत बनी हुई है। गत मंगलवार को दो पट्टाधारक भी काश्तकारी परमिट की आड़ में, उनके लिए आवंटित एरिया में घुसकर खनन किए जाने की शिकायत लेकर डीएम के पास पहुंचे तो हड़कंप मच गया। इसको गंभीरता से लेते हुए डीएम टीके शिबू के निर्देश पर जिला खान अधिकारी जेपी द्विवेदी की अगुवाई में प्रशासन और खान महकमे की संयुक्त टीम बुधवार की दोपहर जुगैल थाना क्षेत्र के बालू साइटों पर धमक पड़ी तो खननकर्ताओं में हड़कंप मच गया।

वली अहमद सिद्दीकी (प्रधान संपादक)

वली अहमद सिद्दीकी एक वरिष्ठ भारतीय पत्रकार हैं और वर्तमान में crimejasoos.news के प्रधान संपादक हैं। उन्होंने पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक समय बिताया है और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचारों को कवर किया है। वे राजनीति और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र में, के विशेषज्ञ हैं।
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