अशोक मद्धेशिया
क्राइम जासूस
संवाददाता
चोपन/सोनभद्र। छठ इस संसार में अपनी तरह का एक अकेला ऐसा लोक पर्व है जो अपने व्यंजना में बहुआयामी है धार्मिक सांस्कृतिक प्राकृतिक आर्थिक सामाजिक आयाम की सबसे ज्यादा प्रबलता है और सूर्य इस त्यौहार के केंद्र हैं इसलिए छठ का महापर्व अतुलनीय है एक मान्यता है कि इसकी उत्पत्ति आदिकाल में बिहार के देव नामक स्थान पर हुई थी दो औरंगाबाद जिले में स्थित है आज भारतवर्ष का ऐसा कोई कोना नहीं है यहां तक कि विदेशों में भी इस महापर्व को धूमधाम से मनाया जाने लगा है
शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के लिए बड़ी संख्या में लोग चोपन सोन नदी के तट पर पहुंचने लगे लोग भक्ति और शक्ति के अनुसार भोग प्रसाद सामग्री का इंतजाम करके आए हुए थे छठ व्रतियों रेल विभाग में टीटी के पद पर कार्यरत मनोज सिंह की माने तो इस पूजा में सूप सबसे जरूरी है दौरा में फल के साथ सब्जियां भी होती हैं
ठेकुआ रहता है शुभ और दौरे में सब सामग्री को रखकर उसे पीले कपड़े से ढक दिया जाता है और तब घाट की ओर चलते हैं टीटी आई बी श्रीवास्तव ने बताया कि पूजन के लिए प्रयुक्त दउरा व्रती फल और पूजन सामग्रियों के वजह से पूरा भारी रहता है इसलिए उपवास कर रहे व्यक्ति को इसे नहीं उठाना पड़ता घर का कोई अन्य युवा सदस्य इसको सिर पर उठाकर पूरी श्रद्धा से ओतप्रोत होकर सभल सभल कर चलता है जगह जगह समूह में लोग छठ के गीत गाते और गुनगुनाते हुए मिलते रहते हैं जो छठ महापर्व लोग मनाते हैं उसे वैसे तो छठी मैया के नाम से जाना जाता है लेकिन और सूर्य को प्रदान किया जाता है सारी दुनिया उगते हुए सूर्य को प्रणाम करती है लेकिन पूर्वांचल के लोग पहले डूबते हुए सूर्य को प्रणाम करते हैं उसके बाद उगते हुए सूर्य को सूर्य के प्रति श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा है शायद इसीलिए छठ हर साल दर साल समृद्ध होता जा रहा है लोगों का यह भी मानना है कि हम बाकी देवताओं को देख या महसूस नहीं कर पाते हैं वरुण सूर्य साक्षात ऐसे देव हैं कि जिन्हें हम प्रत्यक्ष रुप से देखते हैं इसलिए सूर्य पर कुछ ज्यादा ही श्रद्धा स्वाभाविक है इसलिए हमारी जीवन में इनका महत्व है और गहरा विश्वास भी है मान्यता है कि जो मांगा जाता है वह इस व्रत को करने से मिलता है शायद इसलिए भी इसका विस्तार जारी है चोपन सोन नदी के तट पर भी शाम होते-होते अपार जनसमूह श्रद्धालुओं के रूप में उपस्थित कट्ठा हो गया
था नगर पंचायत चोपन द्वारा छठ घाट की साफ-सफाई प्रकाश की व्यवस्था कपड़े बदलने की व्यवस्था तथा कैंप लगाकर चाय और दवा की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई थी शाम को आए लोग काफी संख्या मैं नदी के घाट पर रात भर रुके भी रहे आज सुबह सूर्योदय के साथ ही लोगों ने सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया और प्रसाद का वितरण किया

