शासन के दिशा निर्देशों का अधिकारी उड़ा रहे मजाक डेढ़ सौ बालिकाओ और लगभग दो दर्जन स्टाफ पर मंडरा रहा खतरा।
अशोक मद्धेशिया
संवाददाता
कोरोना की चौथी लहर ने जहां एक ओर केन्द्र व राज्य सरकारों की नींद उड़ा रखी है वहीं सोनभद्र के अधिकारी अभी भी कुम्भकर्णी नींद में ही सोये हुए हैं। बताते चले कि सोमवार में जिला मुख्यालय स्थित राजकीय आश्रम पद्यति बालिका विद्यालय की एक अध्यापिका के पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। जिसकी सूचना विद्यालय प्रशासन द्वारा जिला समाज कल्याण अधिकारी को भी दी गयी थी। बावजूद इसके न तो विद्यालय प्रशासन और न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा विद्यालय को बन्द कराना तो दूर सैनिटाइजेशन तक नहीं कराया गया। वहीं पॉजिटिव अध्यापिका के ट्रेवल हिस्ट्री के स्थान रेनुकूट में भी मंगलवार और बुद्धवार को कोरोना संक्रमित मिलने से इसके संक्रमण फैलने की संभावना की आशंका से इनकार नही किया जा सकता। लेकिन विद्यालय को संचालित करने वाला समाज कल्याण विभाग आखिर किसी प्रकार के एहतियात में इतनी लापरवाही क्यो बरत रहा है यह समझ से परे है। सोमवार को विद्यालय की अध्यापिका के संक्रमित होने की पुष्टि होने के बाद मंगलवार को जब विद्यालय पुनः खुला तो दो दर्जन कर्मचारियों और लगभग 150 बालिकाओ की उपस्थिति वाले इस विद्यालय में चार से पांच लोग स्पष्ट रूप से अस्वस्थ्य नजर आये यहां तक कि विद्यालय के मुख्य लिपिक अस्वस्थता का हवाला देकर घर भी चले गये। कई अध्यापिकाओं ने जब प्रधानाचार्या से अपनी तबियत ठीक न होने की बात कही तो उन्हें एहतियात से रहने की ताकीद दी गयी। वहीं विद्यालय में कई लोगों की तबियत खराब होने की सूचना जब प्रधानाचार्य ने समाज कल्याण अधिकारी को दी तो उन्होंने कहा कि सभी लोग अपना कोविड टेस्ट करा लें जो पॉजिटिव निकले वो घर पर रहें । लेकिन 150 बालिकाएं जो विद्यालय के हॉस्टल में ही रहती हैं उनके स्वास्थ्य की चिंता किसी को नहीं है।

