दीपू तिवारी खास रिपोर्ट
(पिपरी सोनभद्र )
रेणुकूट मुर्धवा स्थित कोटेदार नहीं दे रहे हैं ठीक से राशन। सरकारी गल्ले की दुकान पर कोरोना काल से ही सरकार प्रत्येक व्यक्ति को पांच किया गेहूं व चावल दे रही है जिससे कोई गरीब भूखा पेट न सोए। सरकार 80 करोड़ जनता को राशन दे रही है और यह वितरण प्रणाली 2028 तक के लिए लागू है। किंतु कुछ कोटेदार को लगता है कि वह राशन अपने घर से दे रहे हैं इसलिए गरीबों से अंगूठा लगवा लेते है और राशन देते समय सुबह शाम कहकर दौड़ाने लगते हैं। दुकान बंद देख निराश होकर लाभार्थी घर चले आते है यह धोखा धड़ी सालों से चलता आ रहा है। भोले
भाले कार्ड धारक कहीं बता भी नहीं कह पाते हैं क्यों की ड्यूटी ड्यूटी चले जाते हैं। कभी मुलाकात भी होती है तो सुबह शाम कहकर टरका दिया जाता है। कुछ तो प्रति यूनिट एक किलो कम देते हैं। कहते हैं कि ऊपर से कम आता है। यही शिकायत रही लीलावती कोटेदार के कोटे से ए दस दिसंबर को ग्राहकों को फोन पर मैसेज भेजते हैं कि इस माह चावल नहीं आया है। थोड़ा थोड़ा गेहूं ले जाएं। इसके बाद सुबह शाम वाला चक्कर लगवाने लगे। इसके बाद जब इसकी शिकार सभासद से किया गया तो कहे शाम चार बजे से मिलेगा। कई को शिकायत है की चार महीने से केवल अंगूठा लगवाएं है और राशन नही दिया। कोटेदारों के इस कार्य से सरकार की छवि खराब हो रही है। लोग कहते हैं कि पांच किलो राशन के लिए पंद्रह से बीस दिन दौड़ो तो मिला तो ठीक नही तो खत्म हो गया।

