सोन-संगम के नाम प्रवाहित होने वाली नदी सोन,तालाब जैसी स्थित में कार्रवाई की मांग-ग्रामीण वनवासी।

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अशोक/मदेशिया
संवाददाता

ओबरा/सोनभद्र। ताजा मामला चौरा टोला अगोरी खास के ८२४ ख कई खंडों में १६.१९४ मोरंग बालू खनन क्षेत्र का है। इसमें जहां मजदूरों की जगह, पोकलेन, लिफ्टर पनडुब्बी (नांव) पर लदी पाइप और पंपिंग सेट के जरिए नदी की बीच धारा से बालू खिंच कर किनारे लाई जा रही है, और यहां से पोकलेन के जरिए उसे ट्रकों पर लोड कर भेजा जा रहा है। वहीं नदी की धारा को अवरूद्ध कर जगह-जगह तालाब-बावली जैसी शक्ल नजर आ रही है। नदी की धारा से होकर बनाए गए रास्ते से ट्रैक्टर, ट्रक हाईबा के साथ बड़ी-बड़ी मशीनों का उपयोग दिख रहा है। यह हालत तब है। जब पर्यावरण के कड़े नियम निर्धारित हैं। निगरानी के लिए खान दफ्तर के अलावा क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय संचालित है।
डीएम चंद्रविजय सिंह भी पर्यावरणीय समिति और जिला स्तरीय बैठक में कई बार इसको लेकर निर्देश दे चुके हैं। बावजूद,इस सीजन में खनन शुरू होने के महज माह भर बाद, अगोरी खास चौरा के खंड के पास से जिस तरह की तस्वीरें और वीडियो सामने आई हैं,उसने सारे दावों को तार-तार कर दिया है।
विभागीय सूत्र बताते हैं खंड ख का पट्टा न्यू इंडिया मिनिरल्स से जुडी कंपनी के नाम स्वीकृत है। जो फोटो सामने आई है, उसी स्वीकृत पट्टा स्थल के करीब का बताया जा रहा है। बताते हैं कि यहां खनन में पर्यावरणीय नियमों-जलीय पर्यावरण मापदंडों को तार-तार तो किया जा रहा है कि यहां स्वीकृत साइट की आड़ में दूसरी जगह खनन-बालू लोडिंग की भी बात लंबे समय से चर्चा में है। कुछ लोगों की तरफ से इसको लेकर शिकायतें किए जाने की भी बात सामने आई है। इस स्थल की जो ताजा फोटो सामने आई हैं, उसमें जहां सोन नदी की तलहटी में कुछ झोपड़ियां लगी दिख रही हैं। वहीं, नदी में धारा की जगह, जगह-जगह खनन कर लगाए गए बालू के ढेर, तालाब-बाउली के शक्ल में जमा पानी नदी की प्राकृतिक धारा से छेड़छाड़ कर बनाए गए अस्थाई रास्तों से वाहनों का आवागमन बना हुआ है। इस बारे में यहां बालू साइट से जुड़े कथित संचालकों-देखरेख करने वालों से जानकारी चाही गई तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।
ज्येष्ठ खान अधिकारी राकेश बहादुर सिंह का कहना था कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप से किसी भी रूप में छेड़छाड़ नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं जिलाधिकारी सोनभद्र की तरफ से नदी की प्राकृतिक धारा के स्वरूप को परिवर्तित करने या किसी नदी की धारा को प्रभावित करते हुए, रास्ता बनाने-बांधने का कोई कार्य न करने को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। कहा कि संबंधित साइट और उसके पास बताए जा रहे खनन की जांच की जाएगी। अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो कड़ी कार्रवाई होगी।

वली अहमद सिद्दीकी (प्रधान संपादक)

वली अहमद सिद्दीकी एक वरिष्ठ भारतीय पत्रकार हैं और वर्तमान में crimejasoos.news के प्रधान संपादक हैं। उन्होंने पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक समय बिताया है और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचारों को कवर किया है। वे राजनीति और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र में, के विशेषज्ञ हैं।
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