सेराजुल होदा,
दुद्धी,सोनभद्र। प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय के अथक प्रयास और परिश्रम, एवं दायित्वों के प्रति अत्यधिक रुझान व समर्पण से मिली प्रेरणा से दुद्धी कल कली बहरा के शिक्षिका वर्षा रानी जायसवाल ने लेखिका के रूप में अपनी पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।
अभी हाल में नवाचार से नवपरिवर्तन की ओर किताब की लेखिका श्रीमती जायसवाल ने रविवार को पूर्वाहन लोक निर्माण अतिथि गृह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपनी हस्त लिखित किताब भेंट करते हुए कहा कि शिक्षण कार्य मेरे लिए एक चुनौती है, जो मुझे बच्चों में छिपी हुई है उन बच्चों अंतर्निर्मित शक्तियों को बाहर लाने के लिए प्रेरित किया। इसके लिए मैंने नवाचार का प्रयोग शुरू किया। आदिवासी बाहुल्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को आधुनिकता की मुख्यधारा से जोड़ना एक एकमात्र ऐसी कड़ी है मैंने अपनी पुस्तक शिक्षा में “नवाचार से नवपरिवर्तन की ओर करने का प्रयास किया है। उन्होंने इसका श्रेय विद्यालय के सभी बच्चों, शिक्षकों, सहकर्मियों, अपने बच्चों तथा अपने पति बालकृष्ण जायसवाल को देते हुए कहा कि एक टीम भावना के साथ कार्य करने से यह सब मुमकिन हो पाया।उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा में नवाचार से नवपरिवर्तन की ओर सभी शिक्षकों में नवीन ऊर्जा का संचार करेगी एवं बदलते हुए मेरे भारत की नींव को मजबूत बनाने में सार्थक सिद्ध होगी। जिससे बच्चों तथा समाज का भविष्य उज्जवल होगा।
जनपद मुख्यालय पर पिछले सप्ताह ही जनपद के मुख्य विकास अधिकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी समेत तमाम उच्चाधिकारियों ने पुस्तक का विमोचन कर, प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में इसे समय की मांग बताते हुए अन्य शिक्षकों में नवीन ऊर्जा का संचार करने वाला पुस्तक बताया था। उन्होंने बताया कि सोनभद्र जनपद के बारे में एक पुस्तक शीघ्र ही उनके लेखन का आएगा। अभी पुस्तक प्रकाशन के लिए प्रेषित की गई है।

