*इसे कहते हैं – दीपक तले अंधेरा*
*शाहिद स्थल का सुंदरीकरण अल्ट्राटेक के लिए बना अभिशाप*
*डाला के शहीदों के लिए तिरंगा फहराने तो दूर नमन के लिए नही आया अल्ट्राटेक प्रबंधन।*
अनिल जायसवाल
डाला सोनभद्र – अल्ट्राटेक सीमेन्ट यूनिट डाला ने शहीदों की शहादत पर भी किया मजाक। शाहिद स्थल के नाम से जाना जाने वाला शाहिद स्थल अल्ट्राटेक के लिए आँख की चुभन सी लगती हैं ।
आपको बताते चले कि 2 जून 1991 की गोली कांड डाला के लिए मंजर था। जो कभी कर्मचारीयों ने अपनी बलिदान देकर यु पी सरकार की सीमेन्ट फैक्ट्री को सिंचा था । आज अपने आप मे मुह चिढा रहा हैं । और हस रहा अल्ट्राटेक प्रबंधन ।
1991 में डालमिया के आने बाद पुनः जब सीमेन्ट फैक्ट्री सरकार के अधीन हुई जिससे कर्मचारियों में एक उम्मीद जगी जिसका पुनः 2006 में जेपी एसोसिएट्स को सौप कर डाला के लोगों की खुशियों का गला घोंट दिया गया। जिनके बलिदान की वजह से कभी जेपी एसोसिएट्स ने शहीदों का मजाक बनाया तो वही अल्ट्राटेक द्वारा मजाक बनाया जा रहा है।
2006 से आज तक लगभग 16 वर्ष बीत गये । हर बार विश्व पर्यावरण दिवस पर लाखों के पौधरोपण कर ग्रामीणों और नगर वासियों में दिखावा करना निजी कंपनी की आदत हैं। नेकी का काम किया नही दिखाया जाता है।
इनकी पावर के चश्मे से कभी बलिदानों का स्थल दिखाई नही देता । जहां कुछ पौधा लगाकर हरा भरा कर सुंदरी कारण किया जा सकें । वर्षो के बाद शाहिद स्थल साइन बोर्ड का पुताई कर बोर्ड लिखवा कर खाना पूर्ति कर दिया । कुछ काम शाहिद स्थल के बाउंड्री का खाना पूर्ति करने के लिए किया गया हैं । जिस प्रकार क्षेत्र में अपना नाम करने में अल्ट्राटेक जुड़ी रहती हैं । कास जनहित में भी कुछ दिखावा कर देती शाहिद स्थल डाला से झारखंड से लेकर मध्यप्रेदश ,छतिषगढ़ को जाने वाले यात्री का ठहराव हुआ करता हैं । जहां शुद्व पानी भी मिलना मिश्किल हैं। शाहिद स्थल प्रांगण में लगभग 2 दर्जन फूल लगाने के गमले लगे हुए हैं वह भी रोना रो रहे हैं।

