उमेश सागर
शक्तिनगर।महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी कैंपस शक्तिनगर में, कार्यकारी निदेशक डॉ चंद्रशेखर सिंह के, निर्देशन में,
स्वतंत्रता संग्राम के नायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74 वी, पुण्यतिथि मनाई गई। गांधी जी की प्रतिमा पर, माल्यार्पण के उपरांत, प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित अध्यापकों एवं कर्मचारियों के द्वारा गांधी जी का प्रिय भजन, रघुपति राघव राजा राम, पति त पावन सीताराम।। तथा नरसी मेहता की कविता, वैष्णव जन तो तेने कहिए, पीर पराई जाने रे।
पर दुखे उपकार करे जे,मन अभिमान न आड़े रे।।
महात्मा गांधी नौ बार काशी विद्यापीठ वाराणसी में आए थे। काशी विद्यापीठ वाराणसी के स्थापना के प्रेरणा स्रोत भी है।

इस अवसर पर गांधीजी के प्रति अपना श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए डॉ अनिल कुमार दुबे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महात्मा गांधी मजबूरी नहीं मजबूती का नाम है। गांधी जी का चिंतन आज पूरे विश्व में अमर है। डॉ प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि आज भी गांधी निर्बल के बल बने हुए हैं। आधुनिक परिवेश में जब सामान्य आदमी के समक्ष सारे अधिकार कर्तव्य एवं न्याय कफन और ले रहे हैं तो ऐसे में गांधी ही एकमात्र सहारा सहारा होते हैं। डॉ विनोद कुमार पांडे ने कहा कि गांधीजी के दौर में सामाजिक जीवन बहुत ही संवेदनशील था, जिसे गांधी जी ने अपनी सेवा, विचार धारा, के द्वारा एक नई दिशा प्रदान की। समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्य धारा से जोड़ना, गांधी का उद्देश्य था। डॉ छोटेलाल प्रसाद, गांधीजी की पत्रकारिता को आधुनिक परिवेश में जोड़ते हुए अपने विचार व्यक्त किए। अन्य वक्ताओं में डॉ दिनेश कुमार, डॉ निशा कुमारी, इत्यादि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ मानिक चंद पांडेय के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में श्री मदन लाल,श्री उदय नारायण पांडे, डॉ मनोज गौतम, डॉ अविनाश दुबे, डॉ रजनीकांत राम, डॉ मृत्युंजय पांडे य, डॉ रण वीर सिंह, डॉ राम कीर्ति सिंह, डॉ प्रभाकर लाल, रविकांत, आनंद ,अमित, अंबरीश ,सीताराम, अनिल , इत्यादि विशेष रुप से उपस्थित रहे। यह जानकारी जनसंपर्क समन्वयक डॉ मानिक चंद पांडेय ने दिया।

