बीजपुर (सोनभद्र) बग्गा सिंह/,जरहां वन रेंज क्षेत्र अंतर्गत बघाडू के पास बहने वाली अजीर नदी इन दिनों अवैध बालू खनन का गढ़ बन चुकी है। दिन में नदी किनारे बालू इकट्ठा कर लिया जाता है और रात होते ही खनन माफिया अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रैक्टरों से बालू का अवैध परिवहन कर रहे हैं। इस अवैध कारोबार ने न केवल नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि क्षेत्र के मासूम बच्चों को भी मजदूरी के दलदल में धकेल दिया है।
शनिवार को मौके पर पहुंची पत्रकारों की टीम ने जो दृश्य देखा, वह बेहद चौंकाने वाला था। नदी की धार को रोककर बालू निकाली जा रही थी। छोटे-छोटे बच्चे, जिनकी उम्र पढ़ने और खेलने की है, नदी के किनारे खड़े होकर बालू निकालते मिले। पूछताछ करने पर बच्चों ने बताया कि डोडहर और मोखना गांव के तीन–चार लोग रात भर ट्रैक्टरों से बालू ढोते हैं ।
बच्चों ने बताया कि नदी से एक ढेर बालू निकालने पर उन्हें मात्र ₹10 दिए जाते हैं, जबकि एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में बालू भरने के लिए उन्हें सिर्फ ₹150 मिलते हैं। इस मामूली रकम के बदले उनसे कठोर श्रम कराया जाता है। यह दृश्य देखकर साफ जाहिर होता है कि खनन माफिया किस हद तक जाकर मुनाफा कमा रहे हैं और किस तरह गरीब ग्रामीण परिवारों के मासूम नौनिहालों का शोषण किया जा रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है, फिर भी जिम्मेदार विभाग मौन है । और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। वन विभाग, खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। नदी की धार रोककर किए जा रहे इस अवैध खनन से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, जलस्तर प्रभावित हो रहा है और भविष्य में क्षेत्र में गंभीर पारिस्थितिक संकट पैदा हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही ट्रैक्टरों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठता है, लेकिन कोई रोकने वाला नहीं। माफिया बेखौफ होकर अपना कारोबार चला रहे हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस खुली लूट और बाल मजदूरी के खिलाफ कब जागता है और दोषियों पर कार्रवाई करता है। क्षेत्र के लोगों ने अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और बच्चों को इस अमानवीय शोषण से मुक्त कराने की मांग की है। इस बाबत वन क्षेत्राधिकारी जरहां सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी ।।

