पिपरी संवाददाता दीपू तिवारी
सोनभद्र। जिले के रिहंद डैम के जलशय में मछली शिकार को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार माह जून 2025 में मछली मारने से संबंधित पूर्व टेंडर की अवधि समाप्त हो गई थी। इसके बाद 11 दिसंबर 2025 को नए ठेकेदार को मछली शिकार का टेंडर आवंटित किया गया है
रानी की बात यह है कि टेंडर आवंटन के लगभग एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक मत्स्य विभाग द्वारा संबंधित ठेकेदार को मछली शिकार की विधिवत लिखित स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है।
इसके बावजूद रिहंद डैम में खुलेआम और धड़ल्ले से मछली मारने का कार्य जारी बताया जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार ठेकेदार द्वारा बिना विभागीय अनुमति के ही जाल डालकर मछली शिकार कराया जा रहा है। आरोप है
कि यह पूरा कार्य मत्स्य विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की कथित मिलीभगत से किया जा रहा है। जबकि टेंडर की स्पष्ट शर्तों में यह उल्लेख है
कि विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद ही मछली शिकार की अनुमति दी जा सकती है।
नियमों की अनदेखी कर किए जा रहे इस कथित अवैध मछली शिकार से न केवल शासन के नियमों की खुली अवहेलना हो रही है,
बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। पूरे प्रकरण में मत्स्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।
स्थानीय लोगों एवं सामाजिक संगठनों ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए शासन से उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार एवं अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और नियमों के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई की जाती है।

