बग्घा सिंह ,ब्यूरो चीफ/बीजपुर ( सोनभद्र ) स्थानीय एनटीपीसी परियोजना गेट के समीप सोलर पैनल निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर भूमि समतलीकरण का कार्य जारी है। समतलीकरण के लिए राख (फ्लाई ऐश) फीलिंग करने के बाद नियमानुसार उस पर बाहरी मिट्टी डालने का प्रावधान है, जिसके लिए एनटीपीसी द्वारा मिट्टी ढुलाई व राख प्रेषण का पूरा भुगतान संबंधित ठेकेदारों को किया जाता है। मगर रातोंरात करोड़पति बनने की लालसा में कुछ ठेकेदार व कार्यदाई संस्थाएं नियमों को ताक पर रखकर भारी खेल कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा दूरस्थ स्थानों से मिट्टी लाने के बजाय बगल में बिल्कुल समीप स्थित प्राकृतिक पहाड़ों को बड़े पैमाने पर काटा जा रहा है और उसी मिट्टी का इस्तेमाल समतलीकरण में किया जा रहा है। इससे जहां ठेकेदार की अवैध कमाई रातों-रात तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों के विनाश से पर्यावरणीय संतुलन गंभीर खतरे में पड़ गया है।
हजारों पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है पहाड़ों को काटने के दौरान हजारों पेड़ उखाड़ दिए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में हरे-भरे पहाड़ तेजी से बंजर भूमि में परिवर्तित हो रहे हैं। पेड़ों के कटने से जहां ऑक्सीजन का प्राकृतिक स्रोत नष्ट हो रहा है, वहीं आसपास के गांवों में प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। पहाड़ों के विनाश से होने वाले भूस्खलन का खतरा भविष्य में जनजीवन और संपत्ति के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
साथ ही पहाड़ों की कटाई से जंगली जीव जंतुओं का अस्तित्व भी विलुप्ति के कगार पर पहुंच रहा है पेड़ों के संहार से जंगली जीव-जंतु अपने प्राकृतिक आवास से पलायन करने को विवश हैं। कई दुर्लभ प्रजातियां विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच चुकी हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले जिन क्षेत्रों में वन्य जीव स्वाभाविक रूप से विचरण करते थे, वे अब वीरान हो चुके हैं।
ध्यान रहे कि कुछ ही दिनों पूर्व ओबरा में अवैध खनन से जुड़ी भयावह दुर्घटना हुई थी, जिसमें कई लोगों की दर्दनाक मृत्यु हो गई। इसके बावजूद खनन विभाग, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता देखकर आम जनमानस में भारी रोष है।
लोगों का कहना है कि अधिकारी कान में तेल डालकर सो रहे हैं और अवैध खनन माफिया सत्ता व पैसे के दम पर खुलेआम प्राकृतिक संपदा को नष्ट कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने जिलाधिकारी एवं शासन से तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध मिट्टी दोहन पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले वर्षों में यह पूरा क्षेत्र पर्यावरणीय आपदा का केंद्र बन जाएगा।

