पिपरी / सोनभद्र।
पिपरी नगर पंचायत क्षेत्र में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रिहंद जल विद्युत निगम द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज को आवंटित 11 आवासों को भारी फोर्स की मौजूदगी में खाली करा दिया गया, इस दौरान क्षेत्रीय उप जिलाधिकारी समेत बड़ी संख्या में फोर्स मौजूद रही।
रिहंद जल विद्युत निगम के सिविल अनुरक्षण खंड द्वारा पिपरी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के अध्यापकों को रहने के लिए कई आवासों का आवंटन किया गया था इस दौरान आवास में रह रहे अध्यापक धीरे-धीरे सेवानिवृत्त होते चले गए परंतु उन्होंने आवास नहीं खाली किया। लगभग 2 वर्ष पूर्व जब कॉलेज में नए शिक्षकों की तैनाती हुई तो कॉलेज द्वारा कई नोटिस देने के बाद भी जब आवास खाली नहीं हुए तो नवनियुक्त अध्यापक बच्चेलाल यादव की अगुवाई में मामले को लेकर हाईकोर्ट चले गए जहां हाईकोर्ट द्वारा नए अध्यापकों के पक्ष में फैसला देते हुए सेवानिवृत अध्यापकों को जल्द आवास खाली करने को कहा गया। हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में सेवानिवृत अध्यापक सुप्रीम कोर्ट चले गये परंतु वहां उन्हें कोई राहत नहीं मिली और सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के ही फैसले को बरकरार रखा। बीते 12 फरवरी को आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद सेवानिवृत्ति अध्यापकों को दो माह के अंदर आवास खाली करने को कहा गया, इस दौरान प्रशासन द्वारा कई बार नोटिस दी गई और अंततः सोमवार को भारी फोर्स की मौजूदगी में आवास खाली कर दिया गया।
कदुद्धी
उपजिलाधिकारी ने बताया कि आवास को खाली करा कर उसे नए अध्यापकों को दे दिया गया है इस दौरान उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम के सिविल अनुरक्षण खंड के अधिशासी अभियंता अविनाश सिंह, सीओ पिपरी अमित कुमार, पिपरी थाना प्रभारी राजेश सिंह, राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अनिल राम, अनपरा थाना प्रभारी राजेश कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में सीआईएसएफ व पुलिस फोर्स मौजूद रही।
पिपरी में सोमवार को खाली हुए ग्यारह आवासों के मामले में राजकीय इंटर कॉलेज के पूर्व अध्यापक रमाशंकर पांडेय ने कहा कि उन लोगों ने कोर्ट के आदेश के सम्मान में मकान खाली कर दिया परंतु इस मामले में उन्हें न्याय नहीं मिला है क्योंकि इस मामले में उन लोगों को हाईकोर्ट से यथास्थिति का आदेश मिला हुआ था परंतु इसके बावजूद कोर्ट द्वारा उस मामले को इससे न जोड़ते हुए फैसला दे दिया गया, सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया जिससे उन्हें वहां जाने पर भी राहत नहीं मिली और खाली कराए गए मकान को असली मालिक को न देकर अध्यापकों को आवास आवंटित कर दिया गया जो कि सरासर गलत हुआ है।
वही इस मामले में पूर्व अध्यापक सुभाष पांडेय के पुत्र प्रवीण पांडेय ने आरोप लगाया कि उनका मकान भी खाली कराया गया जबकि उनकी माता जी को यह आवास जल विद्युत निगम द्वारा आवंटित किया गया है और वह नियमतः उसका किराया और बिजली का बिल जमा करते आ रहे हैं इसके बावजूद कोर्ट के आदेश का हवाला देकर आवास को खाली करा लिया गया।

