(सोनभद्र/उत्तरप्रदेश)
बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में नविन सामाजिक और राजनीतिक युग की शुरुआत की बिरसा मुंडा अन्याय के विरुद्ध संघर्षों का इतिहास है।
उक्त बातें बिरसा मुंडा फाउंडेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की सचिव शांति वर्मा ने पुण्यतिथि पर आयोजित संगोष्ठी में कही
शांति वर्मा ने कहा कि भारत के क्रांतिकारी जननायक बिरसा मुंडा ने साहस की स्याही से शौर्य की गाथा लिखी भारतीय जमींदारों और जागीरदारों तथा ब्रिटिश शासकों के शोषण की भट्टी में जब आदिवासी समाज झुलस रहा था तब आदिवासियों को शोषण के नाटक की यातना से मुक्ति दिलाने के लिए आगे आए बिरसा मुंडा ने बेगारी प्रथा के विरुद्ध जबरदस्त आंदोलन चलाया. ब्रिटिश हुकूमत से भी सीधी लड़ाई लड़े .. परिणाम स्वरूप ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया जहाँ अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दिया जिस कारण 9 जून सन 1900 में बिरसा मुंडा शहीद हो गए ।
बिरसा मुंडा के पुण्यतिथि पर उनके शौर्य को याद करके परिचर्चा किया गया और उनके संघर्षो को आत्मसात करके आदिवासियों को कुरीतियों अंधविश्वास तथा उनके सामाजिक आर्थिक व राजनीतिक स्तर को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया गोष्टी परिचर्चा में विकाश शाक्य,प्रतिमा शाक्य,चौधरी यसवंत सिंह ,संज्ञा मिश्रा,कमलेश सिंह,सोनाली आदि विचार व्यक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित किए।

