ओवरलोड कोल परिवहन ट्रकों से सड़क पर गिर रहे कोयले के बोल्डर।

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उमेश सागर संवादाता

नियमों को ताक पर रखकर हो रहा कोल परिवहन, तिरपाल से ढंकना महज खानापूर्ति।

ओवरलोड कोल परिवहन ट्रकों से सड़क पर गिर रहे कोयले के बोल्डर।

ऊर्जांचल। सिंगरौली एवं सोनभद्र जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों पर नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड के कई कोयला खदानों से ट्रक एवं हाईवा के माध्यम से विभिन्न बिजली संयंत्रों एवं बाहर के उपक्रमों के लिए कोल परिवहन होता है। कोल परिवहन के लिए कोल इंडिया द्वारा बकायदे नियम कानून है। लेकिन ऊर्जांचल में सभी नियम कानूनों को ठेंगा दिखाते हुए ट्रांसपोर्टर मनमाने तरीके से कोयला परिवहन कर रहे हैं और आम आदमी के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं।

तिरपाल से ढँक कर कोल परिवहन महज दिखावा है। जब कभी कोल इंडिया का बड़ा अधिकारी जांच के लिए आता है तो उस समय ट्रांसपोर्टर सभी नियमों का पालन करते हुए दिखते हैं लेकिन आम दिनों में तिरपाल से ढक कर कोयला परिवहन महज खानापूर्ति भर रह गया है। फटे तिरपाल, आधा अधूरा ढंकना और कभी-कभी तो बिना तिरपाल के ही कोयला परिवहन संचालित हो रहा है।

ओवरलोड कोयला परिवहन, आम आदमी के लिए जान का खतरा-

कोयला परिवहन कर रहे ट्रक ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में ओवरलोड कोयला लेकर चल रहे हैं। इससे मुख्य मार्ग पर ट्रकों से कोयले के बोल्डर गिरकर सड़क पर बिखर जा रहे हैं और आम आदमियों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। बीना आवासीय परिसर के पास शुक्रवार को कोयला राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिखरा हुआ दिखा एवं अंबेडकर नगर मुख्य सड़क पर आए दिन ट्रकों से गिरते हुए कोयले को देखा जा सकता है। जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है और ट्रांसपोर्टरों से मिलने वाले चढ़ावे के कारण अंजान बने बैठे हैं।

वली अहमद सिद्दीकी (प्रधान संपादक)

वली अहमद सिद्दीकी एक वरिष्ठ भारतीय पत्रकार हैं और वर्तमान में crimejasoos.news के प्रधान संपादक हैं। उन्होंने पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक समय बिताया है और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचारों को कवर किया है। वे राजनीति और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र में, के विशेषज्ञ हैं।
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