सेराजुल हुदा
दुद्धी / सोनभद्र। स्थानीय दुद्धी तहसील क्षेत्र अंतर्गत दुद्धी -अमवार मार्ग पर खजुरी ठेमा नदी गेट के पास रेलवे द्वारा बनाया गया अंडर पास मार्ग स्कूली बच्चों सहित दर्जनों गाँव के ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया था। बरसात के पानी से जलमग्न अंडर पास से गुजरने के लिए स्कूली बच्चे तथा ग्रामीण मजबूर थे। क्राइम जासूस संवाददाता ने इस खबर को प्रमुखता से अपने न्यूज़ चैनल पर निकाला था | जिस पर रेलवे विभाग ने संज्ञान लेते हुए मोटर के माध्यम से अंडर पास मे भरे हुए पानी को निकाल कर आवागमन को सुचारू रुप से चालू कराया | जिसके बाद अमवार सहित दर्जनों गावों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है | आपको बता दें कि ठेमा नदी के पास रेलवे विभाग द्वारा बनाया गया रेलवे क्रासिंग दुद्धी ब्लॉक एवं तहसील मुख्यालय आने के लिए एक मात्र मार्ग है जहाँ हजारों लोग प्रतिदिन आते -जाते हैं, लेकिन रेलवे विभाग ने ठेमा गेट को बन्द कर अंडर पास मार्ग बनाया , ताकि लोगों को रेलवे गेट खुलने का इंतजार न करना पड़े लेकिन रेलवे द्वारा आमजन की सुविधा के लिए बनाया गया अंडर पास अब मुसीबत बन गई | क्योंकि अंडर पास बनने के बाद रेलवे क्रॉसिंग मार्ग पर गड्ढे खोदकर बन्द कर दिया गया हैं और अंडर पास मे कभी- कभी इतना पानी भर जाता है कि साईकिल से स्कूल आने -जाने वाले बालक- बालिकाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है | तो वहीं दर्जनों गाँव के ग्रामीणों को आवागमन मे भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़़ रहा था | फिलहाल रेलवे विभाग द्वारा पानी निकासी के बाद दर्जनों गांव के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है |
अंडर पास में लगे जाली से नही निकल पा रहा पानी –
खजुरी ठेमा गेट के पास बने अंडर ग्राउंड मार्ग के जाली से पानी नही निकलने के कारण बरसात का पानी भर जा रहा हैं जिससे लोगों को काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हैं।रेलवे द्वारा पानी निकलने के लोहे की जाली लगाई गई है लेकिन वह पानी खींचने में नाकाम साबित हो रहा है, इसलिए बरसात की पानी इकट्ठा होने से राहगीरों को फजीहत झेलनी पड़ रही है।
स्कूली बालिकाओं को झेलनी पड़ रही सबसे अधिक परेशानी –
खजुरी रेलवे अंडर पास में पानी भर जाने से सबसे अधिक परेशानियों का सामना स्कूल आने -जाने वाली बालिकाओं को करनी पड़ रही है। बालिकाएँ सुबह -सुबह स्कूल या कोचिंग के लिए साईकिल से निकलती है तो उन्हें अंडर पास पुलिया में भरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है और पानी अधिक जमा होने के कारण कभी कभी बालिकाओं को वापस भी होना पड़ता है क्योंकि भरे पानी में बालिकाओं को जूता -मोजा खोलकर गुजरना पड़ता हैं। कभी-कभी तो स्कूली बच्चे जान हथेली पर लेकर खुले रेलवे क्रॉसिंग से भी गुजरने को मजबूर हैं।

