अशोक मदेशिया
संवाददाता
चोपन/सोनभद्र। आदर्श नगर पंचायत क्षेत्र के चोपन बैरियर पर चल रहे श्री विशाखा रमणबिहारी रासलीला मंडल वृन्दावन के द्वारा चतुर्थ दिवस पर भगवान भोले शंकर का अपमान का बदला लेने के लिए भगवान द्वारा उत्पन्न जालंधर सबसे पहले भगवान भोले शंकर से उनकी त्रिशूल लेके इन्द्र से युद्ध करने के लिए जाता है तो रास्ते में नारदजी मिलते हैं। तो जालंधर नारद जी को अपना गुरु बना लेता है और अपने गुरु के आदेश पर ब्रम्हा जी से ब्रम्ह शक्ति और भगवान विष्णु से सुदर्शन चक्र लेकर इन्द्र से युद्ध के लिए रवाना हो गया सभी देवताओं से युध्द करते करते जब जालंधर थक गया तो राजकुमारी वृन्दा के वन में विश्राम के लिए रुक जाता है। वहीं राजकुमारी वृन्दा ने यह प्रण कर रखा था कि जिस भी पुरूष को सर्वप्रथम अपने बगीचे में देखुगी उसी व्यक्ति से अपना व्याह रचाउगी। विवाह के उपरान्त वृन्दा ने अपने पति जालंधर को सत्वत का माला पहनाती है। और कहती हैं कि जिस दिन मेरा पतिव्रत धर्म भ्रष्ट होगा उस दिन आप के गले से यह माला टूट जायेगी उस दिन आप की मृत्यु हो जायेगी। तो भगवान विष्णु ने छल से जालंधर का रूप धारण कर वृन्दा का पतिव्रत धर्म को भ्रष्ट कर देते हैं। और वृन्दा को जब अभास होता है तो वृन्दा भगवान विष्णु को श्राप दे देती है कि आप पथर के बन जाओ तो विष्णु जी के पथर बनते ही। वहां लक्ष्मी जी आति है और वृन्दा को वन की लकड़ी बन जा। तो नारदजी ने कहते कि आप पथर तो होगे लेकिन शालिग्राम के रुप में और वृन्दा तुलसी के रूप में रहेगी और जब तक भगवान शालिग्राम के ऊपर तुलसी का भोग नहीं लगाया जायेगा जब तक भगवान की पूजा सफल नहीं होगी।।
इस पुनीत अवसर पर संजीव त्रिपाठी,राजा मिश्रा,सुनील सिंह प्रदीप अग्रवाल,विमल साहा, महेन्द्र केशरी,कैलाश, नागेश्वर, सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन स्वामी दाऊ दयाल उपाध्याय ने किया।
देवाधिदेव महादेव का अपमान किया इन्द्र ने तो पुत्र जालंधर को किया उत्पन्न।
By: वली अहमद सिद्दीकी (प्रधान संपादक)
On: Tuesday, December 13, 2022 5:31 PM
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