अनिल जायसवाल
डाला सोनभद्र – ओबरा वन प्रभाग अंतर्गत तेलुगूडवा के पास आराजी संख्या 2827 में कन्हाई पुत्र रामप्रसाद निवासी तेलगुड़वा अपने 25 वर्षों से पुराने कब्जे की जमीन पर खेती करने के लिए हल चला रहा था । इरफान व वाचर घर पर पहुंचते हैं और घर पर खाना खा रहे कन्हाई को घर से बाहर निकलने को कहा जाता है गरीब आदिवासी खाना खाते समय बताता है कि खाना खाकर हम बाहर निकलते हैं इतने में अति भद्दी-भद्दी गालियों का स्लोगन किसान के लिए शुरू कर दिया जाता है। गाली सुनकर किसान डर के वजह से घर से बाहर निकलता है
कन्हाई को लगभग 10 वर्ष पहले 2011-12 सत्र में वनाधिकार अधिनियम के तहत रकवा 0.300 हे0 पट्टा आराजी संख्या 28 27 में ही मिला हुआ है जिस पर वह खेती करने के लिए हमेशा हल चलाया करता था पहले की भांति वह आज भी चला रहा था वन कर्मी द्वारा अरहर, गेहूं अन्य खाद्य पदार्थ घुस में मांगे गए थे जो किसान मजबूरी में नहीं दे पाया ऐसी स्थिति में इस घटना को अंजाम वन कर्मी द्वारा दिया गया।
आपको बताते चलें कि कन्हाई डरा हुआ किसी तरह कर्मी के कहने पर वन चौकी पर साथ जाता है जहां उसे कमरे में बंद करके और निहुरा करके, लाठी से मारा जाता है चोट लगने के कारण पैर में गंभीर चोटें आई हैं तथा पीछे भी चोटे आई है जिसकी शिकायत कन्हाई द्वारा समाज कल्याण राज्य मंत्री संजय गौड़ जी से की गई जहां उन्होंने आश्वासन दिया कि मैं अभी बाहर हूं जैसे ही आता हूं उसके निदान करूंगा तथा चोपन थाने को भी निर्देशित किया गया ऐसे में कन्हाई ने चोपन थाने को लिखित आवेदन दिया है परंतु समाचार लिखे जाने तक कोई सुनवाई नहीं की जा सकी ऐसे में एक गरीब मजदूर किसान अपना दुखड़ा किसको सुनाए।

