अशोक मद्धेशिया
संवाददाता
ओबरा/सोनभद्र। इंटर कॉलेज में कक्षा 6,9,11 में नए प्रवेश हेतु आवेदन पत्र देकर रोक लगा दी है जो अत्यंत निंदनीय है 1964 से स्थापित राजकीय जूनियर हाई स्कूल उच्चीकृत होकर ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में स्तुत्य सेवाएं दी है जिसका गौरवशाली इतिहास से हम सभी वाकिफ हैं शिक्षकों की कमी को आधार बनाकर और इंटरमीडिएट कॉलेज को बंद करने की साजिश है जब कभी भी परियोजनाएं स्थापित होती हैं तो आसपास के जनता के हितों में कालेज अस्पताल सड़क बिजली पानी पौधारोपण आदि की बड़ी-बड़ी घोषणाएं जनसुनवाई में स्वीकारी जाती है ओबरा में पहले से एबी थर्मल परियोजना स्थापित है अब थर्मल की सी परियोजना से भी बिजली उत्पादन होने लगेगा। क्षेत्रीय जनता इस परिजनों से उत्सर्जित विभिन्न प्रदूषण (वायु, जल, मृदा ध्वनि आदि)से काल कवलित हो रही है उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन ऊर्जा मंत्रालय के उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज में नए प्रवेश नहीं लेने पर क्षेत्रीय अभावग्रस्त निर्मल कमजोर आदिवासी एससी एसटी आदि के विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित हो जाएंगे। नागरिक और सुविधाओं के कारण ही सोनभद्र उग्रवाद के चपेट में भी आ रहा है। ओबरा में कोई राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज भी नहीं है जिसमें बालक बालिका एक साथ पढ़ सकें।हम सभी को अंदेशा है कि अरबों की संपत्ति वाले ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज की निजी घरानों को देने की गंभीर साजिश चल रही है। जिसका हम सभी प्रबल विरोध करते हैं।
ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज की सभी कक्षाओं में पूर्व की भांति प्रवेश के लिए जाएंऔर एडमिशन हेतु प्रवेश आवेदन पत्र वितरित की जाए। इन्हीं सब बातों को लेकर ओबरा इंटर कॉलेज के छात्र छात्राओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

