*अशोक मद्धेशिया*
*क्राइम जासूस*
*सवादता*
ओबरा/सोनभद्र। पिछले माह कई खदानों की हो चुकी है नापी, बावजूद कब होगी कार्रवाई डाला से लेकर बिल्ली-मारकुंडी क्षेत्र में कई खदानों की नापी हो चुकी हैं। इसमें कुछ खदानों ऐसी हैं, जिनकी एरिया धारा बीस बाद प्रकाशन के बाद सिकुड़ गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नापी में संशोधित एरिया से बढ़कर खनन की बात भी सामने आई है लेकिन उस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अलबत्ता जांच के लिए आए आदेश के क्रम में एक साथ बीस खदानों में खनन तो प्रतिबंधित कर दिया गया लेकिन नापी के दौरान किस खदान में अनुमन्य मात्रा और सीमा से अधिक खनन मिला और इसको लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई, इस पर जहां खान महकमे की तरफ से चुप्पी साध ली गई हैं। वहीं खान विभाग के जिम्मेदारों की मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं। सफेद सोने की पहचान रखती हैं यहां की पत्थर खदानें जिले की पत्थर खदानों को सफेद सोने की खदानों के रूप में भी पहचाना जाता है। इस धंधे में होने वाली अकूत कमाई का इस कदर आकर्षण है कि सत्ता और शासन में शीर्ष पर बैठे लोगों का सीधे संरक्षण मिलने की बात जहां पूर्व में कई बार सामने आ चुकी है। वहीं जिले में पूर्व में तैनात रहे क्लास दो के कई आफिसरों को अपने परिवार के सदस्य या रिश्तेदारों की आड़ में खदानों में पार्टनर बनने की भी बातें सामने आती रही है। इसमें प्रशासन और पुलिस दोनों महकमों से जुड़े लोगों का नाम पूर्व में सुर्खियां भी बटोर चुका है।

हालांकि डीएम की सख्ती पर कोई सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं, लेकिन खनन महकमे के लोगों द्वारा जांच के नाम पर अपनाई जा रही लचर प्रणाली और कार्रवाई एवं गोपनीयता और कारवाई को लेकर लोगों में उठने लगे हैं तरह-तरह के सवाल को अब देखना यह हैं कि समुचित उठने कब होती हैं उठने शुरू हैं।

