उमेश सागर ऊर्जांचल ब्यूरो
साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था सोन संगम की ओर से,कोरोना की गाइडलाइन को देखते हुए, ऑनलाइन, महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की , जयंती की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी तथा काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री विनय कुमार अवस्थी अपर महाप्रबंधक तकनीकी सेवाएं एनटीपीसी शक्ति नगर के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का श्री गणेश अतिथियों के स्वागत तथा विषय की स्थापना, डॉ मानिक चंद पांडेय के द्वारा किया गया। निराला के बहुआयामी व्यक्तित्व प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि निराला ने अपने लेखन के द्वारा तत्कालीन समाज को एक नई दिशा प्रदान की। उनकी प्रगतिवादी सोच कहीं ना कहीं सामाजिक रूढ़ियों को धराशाई किया।
संगोष्ठी के क्रम में डॉ अनिल कुमार दुबे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए उनकी प्रगतिवादी कविताएं भिक्षुक दान तोडती पत्थर का उदाहरण देते हुए कहा कि निराला आधुनिक परिवेश में भी प्रासंगिक है। इस ऑनलाइन कार्यक्रम में वाराणसी से जुड़े पंकज श्रीवास्तव वरिष्ठ प्रबंधक भारतीय जीवन बीमा निगम वाराणसी ने कहा कि, निराला हिंदी साहित्य के देदीप्यमान नक्षत्र हैं। इसी क्रम में, श्री चंद्रशेखर जोशी प्राध्यापक सेंट जोसेफ स्कूल शक्तिनगर ने अपने वक्तव्य में निराला जी से जुड़ी कई बातें बताया।
काव्य गोष्ठी का प्रारंभ कृपाशंकर माहिर मिर्जापुरी, की सरस्वती वंदना से हुआ। तदुपरांत श्री रमाकांत पांडे ने अपनी कविता के माध्यम से एक सुंदर शुरुआत कुछ इस प्रकार किया
चुनावी दौर आया है,
बसंती रंग लाया है।
चला सकता वही है देश,
जिसमें राष्ट्रभक्ति हो।
बकवास बंद कर लो,
सभी विरोधियों।
अच्छे बुरे को पहचानने का,
दौर आया है।
लखनऊ से पधारे श्री महेश चंद्र गुप्ता ने निराला के प्रति अपने शब्द सुमन अर्पित करते हुए कहा कि
जिसके कृत्य में संवेदना ओं की धधकती थी आग
संस्कृ ती के प्रति निष्ठावान,
ऐसे थे सूर्यकांत त्रिपाठी निराला।
माहिर मिर्जापुरी ने, राष्ट्रीयता से ओतप्रोत तिरंगे को सलाम करते हुए कुछ इस अंदाज में अपनी प्रस्तुती किया
भारत की एकता का, पहचान है तिरंगा।
सारे जहां में सबसे,
आला है तिरंगा।।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री विनय कुमार अवस्थी ने निराला जी के प्रति अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कुछ इस प्रकार अपने शब्द प्रस्तुत किए
बहुत कष्ट से जीवन पाला,
सूर्यकांत व्यक्तित्व निराला।
सत्य जिंदगी पता उन्हें था,
कष्ट की मार वक्त की सहली।।
अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर डॉ छोटेलाल, मदनलाल, डॉ विनोद कुमार पांडे य, के साथ-साथ अन्य लोग उपस्थित रहे।
डॉ मानिक चंद पांडेय
सचिव
सोन संगम शक्तिनगर।

