सोनभद्र जिले के हजारों बैंक कर्मचारी रहे हड़ताल पर
सोनभद्र:16दिसम्बर से बैंक की दो दिवसीय हड़ताल शुरू हो चुकी है। इसके चलते देशभर के बैंकों का काम-काज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बैंकों की हड़ताल से लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि सरकार के प्राइवेटाइजेशन को लेकर चल रही तैयारियों का विरोध करने के लिए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन ने हड़ताल करने का एलान किया है। जिसके तहत नौ बैंक यूनियनों की एक संस्था यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के हड़ताल के आह्वान के बाद आज जिलेभर की बैंक शाखाएं बंद कर दी गईं। इसके चलते इनमें काम नहीं हो सका और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। नतीजतन, हड़ताल के कारण शाखाओं में जमा और निकासी, चेक निकासी और ऋण मंजूरी जैसी सेवाएं ठप रहीं। हालांकि इस बीच एटीएम के सामान्य रूप से लेन-देन जारी रहा। इस दौरान हड़ताल से करीब दो सौ करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ।
बता दें कि भारतीय स्टेट बैंक सहित सार्वजनिक क्षेत्र के सभी ऋणदाताओं ने बैंक की दो दिवसीय हड़ताल को लेकर अपने ग्राहकों को पूर्व में सूचित किया था कि हड़ताल के कारण उनकी शाखाओं में सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, निजी क्षेत्र के ऋणदाता जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक रोज की तरह काम कर रहे हैं
वहीं आज सुबह जुलूस की शक्ल में बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों ने नगर के बढ़ौली चौक पर निजीकरण का विरोध करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया
एआईजीए के सचिव सुबोध कांत दिवाकर
ने बताया कि “यह हड़ताल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के सरकार के फैसले के खिलाफ है, जो राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सरकार से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके निजीकरण से देश का आर्थिक और सामरिक ढांचा चरमरा जाएगा तथा अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आम जनमानस की आशाओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करते हुए सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बैंकिंग सुविधाओं को मुहैया कराया है। इनके निजीकरण से बैंकिंग सेवाएं आम जनमानस के पहुंच से बाहर हो जाएंगी

