अशोक मद्धेशिया
संवाददाता
*चोपन में विश्वकर्मा भगवान के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भीड़ आती हैं।*
चोपन/सोनभद्र।नगर के कई स्थानों पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जा रही है। रेलवे के कई विभाग के साथ ही नगर के ऑटो-जीप स्टैंड पर विश्वकर्मा पूजा की धूम सुबह से ही देखी जा रही है। विश्वकर्मा पूजा के दिन सूबह ही सभी जगहों पर पूजा-अर्चना की गई। वहीं नगर में ऑटो-जीप स्टैंड पर कमेटी द्वारा विश्वकर्मा भगवान की प्रतिमा भी स्थापित की गई। स्टैंड पर हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ साफ देखी जा सकती है। इस दौरान मेले का भी लुफ्त उठाते नज़र आये लोग। आपको बता दे कि, चोपन में विश्वकर्मा भगवान के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भीड़ आती है।
मान्यताओं के अनुसार-
भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। इसलिए इस दिन उद्योगों, फैक्ट्रियों, वाहन और हर तरह की मशीन की पूजा की जाती है, कारीगर अपने औजारों का पूजन करते हैं।
स्वर्ग लोक से लेकर हस्तिनापुर तक का किया निर्माण-
पौराणिक काल के सबसे बड़े सिविल इंजीनियर कहे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की पूजा कन्या संक्रांति को होती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, इसलिए इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहते हैं।
प्राचीन काल की इन राजधानियों का किया निर्माण-
मान्यता है कि प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थी, उनका निर्माण भगवान विश्वकर्मा के द्वारा ही किया गया। सतयुग का ‘स्वर्ग लोक’, त्रेता युग की ‘लंका’, द्वापर की ‘द्वारिका’ या फिर कलयुग का ‘हस्तिनापुर’ हो। ‘सुदामापुरी’ की तत्क्षण रचना के बारे में भी यह कहा जाता है कि, उसके निर्माता विश्वकर्मा ही थे।
इस तरह हुई भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति-
एक कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में सर्वप्रथम ‘नारायण’ अर्थात साक्षात भगवान विष्णु सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए। उनके नाभि-कमल से चर्तुमुख ब्रह्मा दृष्टिगोचर हो रहे थे। ब्रह्मा के पुत्र ‘धर्म’ तथा धर्म के पुत्र ‘वास्तुदेव’ हुए। कहा जाता है कि, धर्म की ‘वस्तु’ नामक स्त्री से उत्पन्न ‘वास्तु’ सातवें पुत्र थे, जो शिल्पशास्त्र के आदि प्रवर्तक थे। उन्हीं वास्तुदेव की ‘अंगिरसी’ नामक पत्नी से विश्वकर्मा उत्पन्न हुए। पिता की भांति विश्वकर्मा भी वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य बने।

