गणतंत्र दिवसः झंडा फहराने तक सीमित लोकतंत्र या सच्ची आजादी?

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पिपरी ( सोनभद्र)हर साल 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस के रूप में राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं, परेड देखते हैं और स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित करते हैं। लेकिन सवाल उठता है-क्या यह केवल प्रतीकात्मक उत्सव बनकर रह गया है, या वास्तव में हमारे लोकतंत्र ने आम नागरिक को स्वतंत्र और सशक्त बनाया है? 26 जनवरी 1950 को हमारा देश संविधान के तहत एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ। संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार, स्वतंत्रता, न्याय और अवसर देने का वचन दिया। 76 साल बाद भी क्या आम नागरिक यह महसूस कर सकता है? या स्वतंत्रता केवल झंडा फहराने और परेड देखने तक सीमित रह गई है?

राजनीतिक स्वतंत्रताः केवल चुनाव तक सीमित देश में चुनाव तो हर पांच साल में होते हैं, लेकिन क्या हर नागरिक को आवाज सत्ता तक पहुँच पाती है? सत्ता का केंद्रीकरण,
भ्रष्टाचार और मीडिया पर दबाव यह संकेत हैं की किसानी, मजदूरों और युवा बेरोजगारों की समस्याएँ चुनाव के बाद भुला दी जाती हैं। यही कारण है कि राजनीतिक स्वागतकार पूरी करने में वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाता आर्थिक स्वास्थ्य आम आदमी की जेब खाली कर देती है

वली अहमद सिद्दीकी (प्रधान संपादक)

वली अहमद सिद्दीकी एक वरिष्ठ भारतीय पत्रकार हैं और वर्तमान में crimejasoos.news के प्रधान संपादक हैं। उन्होंने पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक समय बिताया है और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचारों को कवर किया है। वे राजनीति और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र में, के विशेषज्ञ हैं।
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