पिपरी से दीपू तिवारी क्राइम जासूस
पिपरी में आस्था और श्रद्धा सागर उमड़ा, छठ महापर्व का तीसरा और मुख्य दिन सौजकारक यानी व्रती जलाशय में जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ पर्व औपचारिक रूप से संपन्न होगा।
छठ पर्व के दौरान बाँस की ढाकी, डगरी, मिट्टी के कोसिया-कुरबर और हांडी चढ़ाई जाती है।
प्रसाद में ठकुवा, भुसुआ, केला, गन्ना, हल्दी, अदरक, विभिन्न मिठाइयाँ और फल शामिल होते हैं।
भक्तगण तक कठोर निर्जला व्रत रखने की परंपरा का पालन करते हैं। चूँकि सभी व्यंजन और अनुष्ठान अत्यंत पवित्रता से तैयार किए जाते हैं, इसलिए छठ को अत्यंत कठोरता वाला पर्व माना जाता है।

